अग्निपथ पर चलकर आओ, अग्निवीर बन जाओ। 
कर्म को पूजा मानने वाले, 
सब कर्मवीर बन जाओ।
राष्ट्रप्रेम की भावना भरी हो कूट-कूट कर तुममें, 
ऐसे राष्ट्र प्रेमी सब राष्ट्रवीर बन जाओ।
नहीं होगी युवदल में कल की कोई फिक्र, 
चलो मुक्त भाव से सब राष्ट्र सबल बनाओ।
न किसी की ताबेदारी, न करनी है चाकरी,
आत्मनिर्भरता के भाव को लेकर चलो उन्मुक्त हो जाओ 
अन्य राष्ट्र हो गए सैन्य बल सुसज्जित, 
भारतवासी सैनिक वेश में अनुपम अलख जगाओ।
भारत माता रही पुकार, 
सुनो नहीं कोई भ्रमित चीत्कार। 
आओ,नवयुवकों तुम आगे आओ,
तुम स्वदेश के अग्निवीर कहलाओ।।

रचयिता  - सुषमा श्रीवास्तव, मौलिक कृति,सर्वाधिकार सुरक्षित, रुद्रपुर, उत्तराखंड।