जीवन की हर सुबह सुहानी होती है।
मनमोहक ठंडी भोर सुहानी होती है।

सूर्यदेव का स्वर्णिम लाल रंग प्यारा।
कितना सुंदर लगता  कितना न्यारा।

धीरे-2 सूर्य की किरणें नभ से आएं।
धरती पर अपना  उजियारा फैलाएं।

सोते पक्षी जग जाते  कलरव करते।
मुर्गे की सुन बाग़ खाट से उठ पड़ते।

प्रभु भजन व स्नान ध्यान को जाते।
पशु पक्षी इंसान उपवन खिल जाते।

बुलबुल बोले व कोयल राग सुनाए।
गमलों-पेड़ों में  पुष्प गुच्छ मुस्काए।

माँ कहे सुन भोर हुई उठ मेरे लाल।
बिस्तर छोड़ पढ़ लिख प्रातः काल।

पढ़े भोर में जो वो याद हो जाता है।
स्कूलों में बच्चा वही फर्स्ट आता है।

उठ भोर में किसान करता है काम।
महिला घर में करती सुबह से शाम।

नई भोर जीवन में सबके रोज आए।
भगवान भाष्कर ये खुशियां फैलाए।

हे!सूर्यदेव तुमसे ही होती नई सुबह।
जीवन आनंदित हो दिन रात सुबह।



रचयिता :
डॉ. विनय कुमार श्रीवास्तव
वरिष्ठ प्रवक्ता-पीबी कालेज,प्रतापगढ़ सिटी,उ.प्र.