एक शख्स थी जो मेरी पहचान मेरा सम्मान, 
       मेरे लिए खास थी, 
     मैं हंसी तो वह उसकी वजह, 
    मैं गुस्सा तो वह मनाने की वजह, 
      मैं ख्वाब तो वह मेरी नींद, 
     मैं प्यार तो वह एहसास, 
           मैं धुप तो वह छावं, 
       मैं दिन तो वह रात, 
     मैं भुख तो वह प्यास, 
     मैं पतझड़ तो वह बंसत, 
       मैं कलि तो वह फूल, 
मैं छोटा सा आशियाना तो वह पूरा  जंहा थी, 
      मैं शरीर तो वह  रूह थी, 
मैं जिंदगी तो वह सांसे थी, 
एक शख्स थी जो मेरी पहचान , 
    मेरा सम्मान मेरे लिए खास थी। । 
वो कोई और नही मेरी माँ थी ।।👩‍👧👩‍👧