आ गया है समय फिर से,
अब तू जीत के निकल...
कहीं अकेला फँस न जा,
इस भिड़ से निकल...
आ गया है समय......
ना परवाह कर तू नाकामी की,
हौसला चल बुलंद कर...
मौका मिला एक बार फिर,
जा सपने तू साकार कर...
आ गया है समय......
सरपट् भाग...देख!
नाकाम बहुत है...
हौसलों पर टिके रहने की,
गुलाम बहुत है...
अकड़ दहाड़ चल दौड़ लगा,
देखना झुकेगी आसमां अब ना देर कर...
आ गया है समय......
आगे आ...भीड़ को छोड़ चलो,
अपने मंजिल के पथ पर अब दौड़ चलो...
देख...फैलाये हैं हाथ तेरी दुआं को,
दे जीत की सलामी...खुद पे यकींन कर...
आ गया अब समय......
✍ विकास कुमार लाभ
मधुबनी(बिहार)

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