वो मुझे यूँ रुला कर चली गयी 
मैं उसे ताकता रह गया,
उसके जाने दुःख ये हुआ मैं उसे 
ढूंढता रह गया 
क्या ख़बर थी इस तरह जाएगी 
मैं उसे रोकता रह गया 
आख़िर में अल्लाह हाफिज वो करके गयी
मैं उसे देखता रह गया,

दिल मेरा यूँ दुःखा कर गई वो 
मेरे अश्को की बौछार होने लगी 
मैंने पूछा जब दिल से तो कहना लगा
इत्तिफाकन हुआ कुछ ज़रूर ऐसा होगा
जिससे उसको अचानक ही जाना पड़ा 
मुक़ीतुर्रहमान 
बाराबंकी उत्तर प्रदेश