कहते हैं सब  तुम मेरी ही पुरी  परछाई  हो,

इसीलिए दिल की धड़कन और जान भी हो।


मेरी चेहरे की मुस्कान भी  तुम ही हो  गुड़िया,

मेरी घर के खुशियों की तुम हो अनमोल पुड़िया।।


तुम ही मेरी अनमोल रत्न हो तूम ही  हो‌ शान,

तेरे खुशियों में  मेरा हैं जीवन और धन-धान्य।


क्यो लगता मैं  तुम्हें प्यार नहीं करता दिल से,

कर्म मेरा भी है करना तेरी कन्यादान गुड़िया।।


लाड प्यार से पाला है हर दुःख तेरी उठाई है,

जरुरी यह भी नहीं हर परिवार  होता कसाई है।


तुमको पता है तुम्हे थोड़े सी चोट लगने पर भी,

सबको बिगडा़ है सबको  खुब डाट लगाई है।।


समाज की नियम पुरानी करना है सम्मान गुड़िया,

एक न एक दिन तेरी भी  तो करना है कन्यादान।


तुझे राजकुमार वर दिलाना काम है मेरी गुड़िया,

जो सदैव तुम्हे करेगा प्यार और सम्मान गुड़िया।।


हर सुख दुःख में रहेगा हमेशा तेरा वह  साथी,

हर में तेरी भी खुब रहेगी मान सम्मान गुड़िया।


अब सदा भर सकूं खुशियों से तेरा दामन,

अब बुढ़े कंधों में न रहा है जान गुड़िया।


तुमसे  ही मेरी हर  खुशियों का मेला है,

तुममें ही बसता मेरा जीवन प्राण  गुड़िया।।


तुमसे ही होती है मेरी  हर जगह सम्मान गुड़िया।

तुम ही हो मेरी अनमोल रत्न तुम ही जान गुड़िया।।



                   नादान