तुम्हारी यादों की अनोखी दुनिया में जी रही हूं।

तेरे साथ जीवन के खुशियों के सपने सी‌ रही हूं।।


मुझे पता है तुम्हे भी याद आती रहती हूं मैं ही।

मैं तेरे अनोखी प्यार की मदिरा को  पी रही हूं।।


शायद तुम्हे भी अच्छा नहीं लगता हो मेरे बिना।

इसीलिए  तेरे लिए संदेश पत्र भी लिख रही हूं।।


मैं तुम्हारी याद में विरहन सी जीवन जी रही हूं।

अब रहा नही जाता तेरे प्रेम बिना एक पल भी।।


कैसे कहूं मैं तूमसे अब तुम भी नादान नहीं हो ।

तुम ही मेरी हर सांस हो तुम ही मेरी जान हो।।


तेरे बिना मैं जिन्दगी कुछ इस तरह जी रही हूं।

तेरे प्रेम की विरह में विष समय की पी रही हूं।।


मेरा भी मन करता है तेरे साथ आजाद पक्षियों की तरह उड़ जाऊं।

अब मैं कैसे अपने मन की  उगती पंखों को अपनी मजबूरी समझाऊं।।


 कैसे मेरी चहचहाहट भरी अविकल  इस मन को‌‌ मैं मनाऊं।

तेरे साथ बिना मैं कैसे खुशियों की उपवन में  झुम आऊं।।


अपनी मन हर एक मऩोरम  इच्छाओं को मैं सील रही हूं।

क्योंकि तुझसे में स्वप्न समुन्द्र में सदैव नदियों सी  मिल रही हूं।।



तुम्हारी यादों की अनोखी दुनिया में जी रही हूं।

तुम्हारी यादों की अनोखी दुनिथया में जी रही हूं।।



                     सोनाली शर्मा