जरुरी नहीं कि नफ़रत मैं भी करूं तुमसे
क्योंकि मैंने तुम्हें सच्चे दिल से अपना माना था
हां कुछ समझा था अधिकार भी मैंने तुम पर
आज पता चला मुझे मैं तो तेरे लिए बेगाना था
मुझे पता है यह मेरा तुम्हें नादान समझना
और बार बार तुम्हारी गलतियों पर डाट देना
तुम्हे यह थोड़ा सा भी अच्छा नहीं लगता
तुम्हें मेरी हर एक बातें भी सच्चा नहीं लगता
पता है मुझे तुम पर अपने से ज्यादे क्यो भरोसा था
क्योंकि तुम्हारे अन्दर देखा वह अनोखा जज्बा था
इस कारण मुझे डर सा लगा रहा कहीं तुम्हें नजर न लग जाए
मुस्काती उपवन की फुल कहीं किसी भोगी माली से न ठग जाए
उम्मीद मैं अब भी लगता हूं तुमसे दूर रहना किनारों से
क्योंकि यह वह धाराप्रवाह है खिंच लेता है मझधारो में
पतवारों की खेप दिखेंगी तुमको बीच धारों में
समहली नहीं तो डुब पड़ेगी इस कायर सी धारों में
मां पिता की स्वप्न समुन्द्र की धारा को तुम गति देना
उनकी खुशियों की उपवन को तुम परिश्रम से सींच देना
उनके उम्मीदों की पुल को किसी आंधी सेकभी टूटने न देना
अपनी गलतियों से कभी उनकी सांसें रुठने न
देना
देना
प्रेमभुषण

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