लौट चले हम उन अंधेरे गलियारों में
जहां सपनों का दीपक तुमने जलाया था
मेरी खामियों को नज़रंदाज़ कर मुझे मेरी तरह अपनाया था।
जहां सपनों का दीपक तुमने जलाया था
मेरी खामियों को नज़रंदाज़ कर मुझे मेरी तरह अपनाया था।
लौट चले हम उन गहरे सन्नाटों में
जहां खुशियों का शोर तुमने सुनाया था
ज़िन्दगी एक खेल हैं कह कर ज़माने से लड़ना तुमने सिखाया था।
जहां खुशियों का शोर तुमने सुनाया था
ज़िन्दगी एक खेल हैं कह कर ज़माने से लड़ना तुमने सिखाया था।
लौट चले हैं उस गुमनाम राह पर वापस
जहां जीने का ख्वाहिश तूने जगाया था
इस मरते रूह को अपनी सांसें देकर तूने ही तो फिर बचाया था।
जहां जीने का ख्वाहिश तूने जगाया था
इस मरते रूह को अपनी सांसें देकर तूने ही तो फिर बचाया था।
लौट चले हैं उन तनहाई भरी रातों के पास फ़िर
जहां इन सूनी आंखों में तूने फ़िर नींद को बुलाया था
सर पे हाथ रख आंखों को मींच मेरे फ़िर एक खूबसूरत सपना दिखाया था।
जहां इन सूनी आंखों में तूने फ़िर नींद को बुलाया था
सर पे हाथ रख आंखों को मींच मेरे फ़िर एक खूबसूरत सपना दिखाया था।
लौट चले उन गुलाबी शामों में फ़िर
जहां तूने प्यार निभाने का वादा बतलाया था
नाराज़ होकर हाथ छोड़ मेरा उन वादों को जब झुटलाया था।
जहां तूने प्यार निभाने का वादा बतलाया था
नाराज़ होकर हाथ छोड़ मेरा उन वादों को जब झुटलाया था।
लौट चले हम उन अंधेरे गलियारों में
जहां सपनों का दीपक तुमने जलाया था
मेरी खामियों को नज़रंदाज़ कर मुझे मेरी तरह अपनाया था।
जहां सपनों का दीपक तुमने जलाया था
मेरी खामियों को नज़रंदाज़ कर मुझे मेरी तरह अपनाया था।
श्रेया भट्टाचार्य

1 टिप्पणियाँ