जाने क्यों बदल गए अहसास उनके
बाद मुद्दत के आये ख्वाब उनके,
 कितनी बदले बदले है अंदाज उनके।

 आज वह मिलकर बेतहाशा खिलखिलाए नहीं 
कैसे हो आप यह कह कर मुस्कुराए नही,
 कुछ अलग अलग से थे रूराग उनके।

 की जो कभी दोस्ती को खुदा कहते थे, तू मेरी धड़कन है कैसे करूं जुदा कहते थे,
  आज बदल गए सांस लेने के एहसास उनके।

 कब जरूरत है तुम्हें कुछ भी कह कर हमें बताने की ,
आदत है हमें आज भी तेरी खामोशी समझ जाने की,
 भर गए पलक जो याद आए अल्फाज उनके।

  कभी जिनको अंधेरी रात में भी चाँद दिखता था,
मेरे अख़्स में चाँद सा सुकून मिलता था,
  बदल गए हैं अब महताव उनके।

 जो कभी अहमियत हकीकत को देते थे ,
बिना मिले ही महसूस रूह से कर लेते थे,
वो क्या समझेंगे हकीकत
 सहन में सज गए हैं अब कागजी गुलाब उनके।

तमाम उम्र साथ निभाने का दावा करते थे
 दूर जाने के ख्वाब से भी डरते थे ,
आज साबित कर दिया कितने गलत थे जवाब उनके।

 एक आह क्या भर ली हमने उनके गले लगकर,
वो यों बोले हमें खुशियां बख्श दो
 पास रख लो यह दर्दे अजाब अपने।

 कभी जो मुहबतों की कशिश देते थे मिलके,
  कितना प्यार झलकता था कभी उनके पैकर में,
 आज मिले तो बड़े बेरुख थे आदाब उनके।

समझ नही आता यह मेरे दिल का वहम है ,
या यह ही हकीकतते आलम है
दिल सकते  में आ गया जो आहिस्ता आहिस्ता उतरे नकाब उनके।

उनकी सूरत पर गौर फरमाया ही नहीं प्यार में हुस्न पर तबज्जो दिल को सिखाया ही नही,
 आज जब गौर से देखा तो पता चला 
कितने दागदार हैं किरदार उनके।

आज भी तन्हाई में सबाल उठता है,
जहन अक्सर यह ही सोचा करता है,
क्या झूठे थे वो खतो खिताब उनके।

                   अंजू दीक्षित
                   उत्तर प्रदेश