इस जीवन में कोई भी परफेक्ट नहीं है,
हम सब यहां रॉन्ग हैं, कोई भी करेक्ट नहीं है,
सब जिए जा रहे हैं, एक दूजे की भीड़ में,
जिनके पास धन दौलत बेशुमार है दोस्तों
जरा जाकर उसके दिल से पूछो कैसी है तेरी सेहत,
क्या तेरी औलाद सही है,
रोते हैं आंसुओं से  बेटी के जन्म पर,
जरा दिल से उनके पूछो जिनके औलाद नहीं है,
संतुष्ट नहीं है वह भी जो कामयाब है,
मिलती जिनको सैलरी बेहिसाब है,
जरा जाकर दिल से उनके पूछो जिसकी ना कोई नौकरी  ना रोजगार है,
संतुष्ट नहीं है वह भी जिन पर आलीशान मकान है,
जरा जाकर दिल से उनके पूछो, जो झोपड़ी में  रहता है,
उसकी ना कोई छत है ना  कोई मकान है,
संतुष्ट नहीं है जो एक कार से, ऐसे भी तो है दुनिया मैं
जिन पर कोई स्कूटर और कोई कार नहीं है,
संतुष्ट नहीं है वह भी कद जिनका छोटा है,
कहते हैं सांवले हैं रंग गोरा नहीं है,
जरा जाकर दिल से उनके पूछो किसी का हाथ नहीं है किसी का पैर नहीं है,
इस जीवन में किसी को सब्र और शांति नहीं है,
संतुष्ट नहीं है कोई भी सबको दुगना चाहिए,
खाली हाथ आए हैं खाली ही जाएंगे,
धन दौलत कार मकान सब यहीं रह जाएंगे,
इन सब के ना होने से कुछ लोग निराश हो जाते हैं,
ले लेते हैं टेंशन डिप्रेशन में पहुंच जाते हैं, 
कुछ तो लगाते फांसी कुछ पानी में डूब जाते हैं,
यह जीवन है बड़ा अनमोल, बड़ी  सिंपल सी बात है,
इस जीवन में कोई भी परफेक्ट नहीं है,
सब यहां रॉन्ग है कोई भी करेक्ट नहीं है|

                                         
                        संगीता वर्मा