"आज की ताजा खबर मुंबई में एक लड़की के साथ हुआ गैंगरेप 'बॉडी को बुरे तरीके से जलाया गया है आधे से ज्यादा बॉडी जल चुकी है; पीड़िता की पहचान रीना के रूप में हुई है ,जो कॉलेज से दोपहर को घर जा रही थी सुनसान सड़क का फायदा उठा कर उसके साथ दरिंदगी की गई ।

"हरिशा तुमने आज की खबर सुनी "पलक ने जैसे ही खबर सुनी वो हरिशा को बताने चली गई क्यूंकि हरिशा की बेटी भी अब बड़ी हो गई थी और उसने भी इसी साल से कॉलेज जाना शुरू किया था ।


जी पलक दी, मैंने भी सुनी बहुत बुरा हुआ उसके साथ उसके मां बाप पर क्या गुजरी होगी जब उन्होंने ये सुना होगा ,"हरिशा ने कहा "। 

"हरीशा तुम भी अपनी बेटी का ध्यान रखा करो उसे अकेले जाने मत दिया करो रात को तो बिल्कुल नहीं "पलक ने कहा और चली गई ।

हरीशा को भी अपनी बेटी नीलम  की फ़िक्र हो रही थी उसने उस का ज्यादा ध्यान रखना शुरू कर दिया था वो उसे अब घर से ज्यादा बाहर नहीं जा देने रही थी।


वहीं दूसरी और रीना का केस जोरो शोरो से पूरे शहर में फैल चुका था ।जगह जगह आरोश किया जा रहा था ,कैंडल मार्च निकाले जा रहे थे ।


रीना छोटी जाति से तालुक रखती थी तो इस समय राजनीति करने वालो को तो खूब मोका मिला हुआ था अपने नंबर बनाने का हर छोटा बड़ा नेता उसके घर वालो को दिलासा और सहानुभूति दे रहे थे ।देखते ही देखते ये राजनीति में प्रवेश कर चुका था ।


वहीं दूसरी और इन सब बातों का नीलम के जीवन पर बहुत गहरा असर पड़ रहा था ।उसे पहले जैसी आज़ादी नहीं दी जा रही थी ।
एक दिन नीलम को कॉलेज से आने में देर हो गई क्यूंकि उसको कोई भी साधन नहीं मिल रहा था  हर तरफ  हो रहे प्रदर्शन के कारण शहरों में सब कुछ बंद था ।

हरीश को उसकी फिक्र हो रही थी ।पलक भी उसके साथ उसके घर पर  ही थी । कि तभी अचानक नीलम आ गई ।


इससे पहले हरीशा उसे कुछ कहती पलक उस बरस पड़ी " क्यों नीलम तुम क्या बच्ची हो जो हर बात तुम्हे समझानी पड़ेगी इतनी देर तक बाहर रहना ठीक थोड़े है ,जल्दी आ जाया करो तुम्हारी मां को फिक्र हो रही थी ,और तुम्हे तो पता है ना आज कल क्या हो रहा था लड़कियों के साथ फिर भी तुम्हे अक्ल नहीं आती ।


अरे भगवान ना करे कल को तुम्हारे साथ ये हो गया तो तुम्हें तो !पलक के आगे बोलने से पहले ही हरिशा ने उसे रोक दिया ।ये क्या बोल रही हो तुम पलक दी मेरी बेटी के साथ क्यों होगा ये सब चुप रहिए आप ।


"नहीं मां बोलने दीजिए ना इन्हे आप भी तो इतने दिनों से मुझे घर पर ऐसे रोक रही हो जैसे रीना के साथ को कुछ भी हुआ मेरी गलती हो ,रीना के साथ जो कुछ भी हुआ उसमें उसकी तो कोई गलती नहीं थी ,एक लड़की अकेली घर नहीं आ सकती क्या ?? और आप सब लोग भी कमाल करते है उन दरिंदो को घर में तो रोक नहीं सकता कोई और हम लड़कियों पर ऐसी खबरे सुन कर बंदिशे बढ़ा दी जाती है ।


अगर पहले से इन सब पर गौर किया जाए तो कभी किसी लड़की के साथ ये ना हो ,रास्ते में कोई अगर लड़की को छेड़ रहा हो तो उसे हटाएगा नहीं कोई ये कह कर सब चले जाते है क्यों किसी के मामले में पड़ना जाने दो ,और फिर बाद में इंसाफ के लिए कैंडल मार्च निकले जाते है ,इंसाफ की गुहार लगाई जाती है , सड़के जाम की जाती है , मरने वाली लड़की के नाम पर पूरा दिन शहर बंद रखेंगे ,क्या मतलब इन सबका जब समय होता है तब तो कोई कुछ करता नहीं है बाद में सब आ जाते है महान बनने ये दिखाने की को किसे साथ गलत होता नहीं देख सकते ।


और रही बात इन राजनेताओं की ये तो बिल्कुल हद्द करते है ,रेप पीड़िता के परिवार को ऐसे सहानुभूति देंगे जैसे सब ठीक हो जाएगा ,मुआवजे की रकम पेश की जाती है ,जैसे ये सब करने से उस लड़की की ज़िंदगी पहल जैसे हो जाएगी वैसे तो विचारी ऐसी लड़कियां बचती नहीं अगर बच जाती है तो समाज उन्हें टिकने नहीं देते जैसे सब कुछ उन्होंने जान बूझ कर करवाया है खुद के साथ ।


और धीरे धीरे ये मामला पूरी तरह राजनीति बन कर रह जाता है बस जिधर देखो सब वोट इकट्ठे करने में लगे रहते है कि किसके नंबर पहले बनते है ।

हद्द करता है मां हमारा समाज भी और आप भी उन्हीं लोगों का हिस्सा बन गई आप को जहां मुझे हिम्मत देनी चाहिए थी वहीं आपने तो मुझे घर में ही बंद कर दिया करना ही है तो उन दरिंदो को करो सज़ा देनी है तो ऐसी दो जिससे कोई दुबारा ऐसा करने की हिम्मत ना करे ना कि आकर अपने नंबर बनने चाहिए ।जिस दिन किसी नेता ने इन लोगो को मौत की सजा दे दी उस दिन वो खुद ब खुद वोट लेने का अधिकारी बन जाएगा ।और अगर इन लोगो ने समय पर ऐसे लोगो को रोकना शुरू कर दिया ना उस दिन ये सब होना बंद हो जाएगा ,फिर ना कैंडल मार्च की जरूरत रहेगी और ना प्रदर्शन करने की ।


इंसाफ भी सभी को नहीं मिलता यहां बस जिसका केस नज़रों में आ गया उसके लिए सब शोर मचाते है उन में से भी एक दो को मिलता है वरना कुछ समय बाद "सब शांत हो जाती है "और रह जाती है तो बस ज़िंदा या मरी हुई उस लड़की की इंसाफ के लिए भटकती रूह।यहां तो इंसाफ भी जाति के नाम पर मांगते है लोग क्यों गलत तो गलत है चाहे जिसके मर्ज़ी साथ हो बस जिसे देखो खुद को महान दिखाने में लगा रहता है फिर चाहे नेता हो ,न्यायलय हो चाहे जनता हो ।

और ये सब ज्यादा देर तक नहीं चलता सब बाद में चुप होकर रह जाते है कोई ना तो इसे खत्म करने की कोशिश करता है और ना कोई ऐसा कदम उठाता है ।बस फिर कुछ दिनों बाद ऐसी ही कोई और खबर आ जाती है और वहीं सिलसिला शुरू हो जाता है ।



नीलम ने आज अपने मन की सारी बातें कह दी और चली गई ।और पलक और हरिशा उसकी बातें सुनकर खुद की गलती का अहसास करने लगी ।


                        मेघा शर्मा