नाश्ता मेज पर लगा है, छवि भागती हुई आती है और हाथ में एक सैंडविच ले कर कहती है " माँ मैं कालेज जा रही हूँ"| "अरे हमेशा की तरह भागी जा रही है नाश्ता तो ढंग से करना चाहिए"माँ ने कहा| जैसे ही छवि घर से निकली उसने देखा पास वाले घर में ट्रक से सामान उतर रहा है, छवि ने सोचा चलो अच्छा है पड़ोस में कोई आ गया है उसे भी कोई सखी मिल जाएगी |
छवि अपने माता पिता की इकलौती संतान है जो बहुत शोख, चंचल एवं बातूनी लड़की है | शाम को जब छवि लौटती है तो जिज्ञासा बस पास वाले घर को देखती है परन्तु कोई दिखाई नहीं देता | घर आकर माँ से पूछती है कि पड़ोस में कौन आया है? माँ बताती हैं कि शर्मा जी का परिवार आया है चलो मिलने चलते हैं | छवि माँ के साथ यह सोच के जाती है शायद उसकी हम उम्र सखी मिल जाये, वे बेल बजाती है एक युवक दरवाजा खोलता है छवि अपना परिचय देती है वह उन्हें अंदर आने को बोलता है| अंदर अंकल आंटी बहुत ही आत्मियता से मिलते हैं, और एक दूसरे के परिवार के बारे में जानकारी एकत्र करते हैं छवि देखती है कि वो लड़का बहुत ही मितभाषी, सौम्य व शान्त स्वभाव का है| उसका नाम राज है उसके माता पिता का देहांत हो चुका है और चाचा चाची के साथ रहता है, पढ़ने में बहुत मेघावी है बीटेक कर रहा है| छवि घर आकर सोचती है काश कोई लड़की आती तो मजा आता|
धीरे धीरे दोनों परिवार में मित्रता बढ़ती है अब राज छवि से कभी कभी बात कर लेता था छवि को जब भी पढ़ाई में कठिनाई आती तो राज उसकी मदद कर दिया करता था|जैसे जैसे दोनों मिलते हैं छवि का दिल राज के प्रति आकर्षित होता है| परन्तु राज छवि से हमेशा गंभीर व सौम्य ढंग से मिलता है| छवि चाह कर भी अपने दिल की बात नहीं बता पाती है, एक दिन छवि को एक तरकीब सूझती है कि राज के सामने उससे बोला नहीं जाता क्यों न वो लिख कर अपने जज्बात बता दे|वो एक काॅपी में लिखती है
आप यूंही अगर हमसे मिलते रहे,
देखिए एक दिन प्यार हो जाएगा|
और राज को कहती कि मेरी पढ़ाई संबंधित समस्या हल कर दो| राज उस पेज को फाड़कर अपने पास रख लेता है और छवि को कोई जवाब नहीं देता, इस पर छवि निराश हो जाती है| राज भी दिल ही दिल में छवि को चाहता है परन्तु यह भी चाहता है कि पहले अपने पांवों पर खड़ा हो जाए फिर छवि के माता पिता से उसका हाथ मांगेगा|जैसे ही राज की पढ़ाई खत्म होती है वैसे ही उसे एक अच्छी कंपनी में जोब मिल जाती है| नयी नौकरी के कारण वह बहुत व्यस्त हो जाता है अब तो छवि की सारी आशाएँ टूट जाती हैं|
एक दिन छवि बाज़ार जाती है तो उसका एक कार से भयंकर एक्सीडेंट हो जाता है उसके शरीर पर बहुत चोटें होने के कारण रक्त स्राव भी अत्याधिक हो गया व टांग में फ्रैक्चर भी हो जाता है| दो दिन बाद उसे जब होश आता है तो अपने आप को एक हाॅस्पिटल में पाती है सामने उसके माता पिता व राज के चाचा चाची बैठे थे| परंतु राज को वहाँ नहीं देख कर एक बार फिर निराश हो जाती है, तभी चाची बताती है कि राज ने लगातार दो दिन तक उसकी बहुत देखभाल की है अभी हमने जबरदस्ती उसे आराम करने भेजा है शाम को आएगा| छवि के दिल में ख्याल आता है कि राज ने उससे कभी प्रेम ही नहीं किया अब तो चोट के कारण चेहरे पर दाग पड़ गया और टांग भी खराब हो गई तो वह खुद ही राज से दूरी बना लेगी|
शाम को राज छवि के लिए फूलों का एक गुलदस्ता ले कर आता है, छवि अनमने मन से लेती है उस में एक पत्र भी होता है यह वही पत्र होता है जिसमें छवि ने गाना लिखा था राज ने उसके आगे लिखा था
ऐसी बातें ना कर ओ हंसी जादूगर
मेरा दिल तेरी आँखों में खो जाएगा
राज छवि का हाथ पकड़ता है और कहता है साॅरी मैंने तुम्हें बहुत इंतजार करवाया|और छवि की आंखों से प्रेम की अश्रुधारा फूट पड़ती है|
लेखिका
सीमा अहमद बानो

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