पत्ते-पत्ते /झड़ - गिरना 
परिवर्तन संसार का नियम है ,और इस नियम में  हर वस्तु, मनुष्य सभी जुड़े हैं .परिवर्तन हर क्षण होता रहता है, उसमें ऋतु म भी एक ऐसी चीज है, जो जीवन के हर पहलू को दर्शाती है .
पतझड़ के बाद जो बसंत आता है ,उसका आकर्षण और मोहक दृश्य चारों और प्रकृति की अनुपम छटा देखते ही बनते हैं.वन्यजीवों से लेकर सृष्टि के हर जीव यहां तक निर्जीव वस्तुओं में भी जैसे जान आ जाती है.मनुष्य के अलावा कोई भी जीव परिवर्तन को जल्दी अपना लेता है.परंतु मनुष्य आसानी से कोई भी परिवर्तन को अपना नहीं पाता है .
अधिकतर मनुष्य ऐसी प्रवृत्ति के होते हैं .जीवन में दुख या कोई गंभीर परिस्थिति आती है ,तो वह संयम खो देते हैं.उसे आसानी से अपनाते नहीं है .उस परिस्थिति को अपने ऊपर इतना हावी कर लेते हैं ,जैसे वह हमेशा रहने वाली है उनके जीवन में .
जिस कारण वह अपने लिए और कठिन परिस्थितियों को जन्म देते हैं .शांत होकर सोचते ही नहीं कि, इससे पहले ऐसा नहीं था.तो यह भी नहीं रहेगा .संयम और विवेक व्यक्ति को हर परिस्थिति से आसानी से निकाल देता है,ठीक उसी प्रकार जैसे पतझड़ के बाद बसंत आता है.
जीवन में भी इसी तरह कुछ पुराना जाएगा ,तभी तो नया आएगा .पतझड़ में भी अपनी ही सुंदरता है कैसे अलग-अलग रंगों के पत्ते हर जगह को ढक लेते हैं .गंदगी को छुपा देते हैं, ठीक उसी प्रकार सकारात्मकता वाले विचार और व्यक्ति की संगति से बुरी परिस्थिति से निकलने में मदद होती है.और जैसे बसंत में होता है ,ठीक उसी प्रकार हमारा जीवन भी पतझड़ के बाद सुंदर से अति सुंदर हो जाता है.

 

              ‌‌ ‌‌       सरोज