काश शतरंज को शतरंज ही की बिसात पर खेला होता......
जीत जाते तुम हमें रंज ना होता.....
मगर बिसात तुमने जिंदगी की बिछा दी.....
जब तक हम समझ पाते तुमने मात दे दी......


                 माधवी शर्मा"  अपराजिता