आज अचानक मुझे एक सच्चा किस्सा याद आ गया| यह बात लगभग बीस वर्ष पुरानी है| कोटा शहर में एक वृद्ध महिला अपने बेटे बहू के साथ रहती थीं|मैंने अपने जीवन में इतनी हंसमुख, जिन्दादिल महिला को नहीं देखा| जिस घर में भी जाती वहाँ हंसी के कहकहे छूटते फिर वो कहती कि अब इंजन में पैट्रोल खत्म हो गया चाय पिला दो या खाने का समय हो तो खाना खिला दो| हम कोटा में ट्रांसफर हो के नये नये गये थे| मोहल्ले वालों ने बताया कि इस महिला का बेटा बहु इनकी बिल्कुल परवाह नहीं करते हैं, न तो खाने को देते हैं न ही अन्य प्रकार से कोई सेवा करते हैं|क्योंकि यह वृद्ध महिला एक अच्छे परिवार से है तो किसी की बुराई नहीं करती है बस अपने दिन काट रही है| यह सुन कर मेरे दिल में उनके प्रति आदर बढ़ गया मैं अक्सर उन्हें चाय नाश्ता, व खाने को पूछ लिया करती थी |
एक साल बाद हमारा ट्रांसफर दूसरी जगह हो गया| कोटा के पड़ौसी के फोन अक्सर आते रहते थे | लगभग दो साल बाद उन महिला की मौत हो गयी| और तेहरवीं वाले दिन जब उनका बेटा घर के बाहर बैठा था तो एक बंदर ने अचानक उस पर ऐसा हमला कर दिया जैसे कोई इंसान पिटाई कर रहा हो | किसी की भी हिम्मत नहीं हुई कि उसे बंदर से छुड़ा दे | सब के मुंह पर यही था कि माँ मरने के बाद सबक सिखा रही है वरना बंदर इंसान की तरह थप्पड़ नहीं मारता है | फिर यह किस्सा कोटा में बहुत मशहूर हुआ |
लेखिका
सीमा बानो

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