तेरा इश्क इतना रुलाक़े गया
आँखों से वहे न आँसू ,खून जिगर का बहाके गया।

इश्क था प्यार ,मुहब्बत भी थे अधूरे
तुझे तो थी मुझसे चाहत ,चाहत के  सारे लफ्ज थे पूरे
उस पूरे पन को क्यों तू अधूरा बनाके गया।

वो वादे वो कसमें, वो खुदको सबसे जुदा बताने की बातें,
वो सुबह से रात तक मुझसे मिलकर वो प्यारी मुलाकातें,
तू क्या था और क्या निकला भरम दिल के सारे मिटाके गया।

सच का तू तो खुदा था।
जमाने की भीड़ से तू तो जुदा था,
थी तेरी सारी बातें झूठी यकीन मेरा तू गिराके गया।

हां याद आओगे तुम मुझको बेहद,
  पर साथ में वो सारे झूठे वादे,
जाना था तो याद एक मीठी सी देके जाते तू तो दर्द सारे जगाके गया।

जब जब गिरेंगे आँखों से यादों की आँसू
उतनी तेरी मुहब्ब दिल से कम होगी,
विश्वास के मेरे सारे घरौंदे तू खाक में मिलाके गया।

यह किस्सा नही खास है ,
जमाने में तुम जैसे बेवफाओं का इतिहास है
कभी किसी पे भरोसा न करना सबक एक नया हमे तू  समझाके गया।

खुशियों में तुम हर कदम साथ थे
मेरे दर्द से फिर क्यों दरकिनार थे,
कोई किसी का हम दर्द नही है, यकीं मुझको पूरा कराके गया।




                   अंजू दीक्षित
                 बदायूँ उत्तर प्रदेश