घर घर में खुशहाली आए,
दुःख के बादल छंट जाए।
मिट्टी वाले दीप जलाएं,
अबकी बार दीवाली में।
दिलों में भाईचारा बनाए
नीयत ना किसी की काली हो,
मन का अंधेरा दूर हो,
अबकी बार दीवाली में।
हर घर में खुशियां बरसे,
दिलों में प्रेम की धारा हो।
सम्मान भरा दीप जलाना,
अबकी बार दीवाली में।
इंसानियत का गला घोंट कर,
छेद न करना थाली में।
मिट्टी वाले दीप जलाना
अबकी बार दीवाली में।
देश के धन को देश में रखना,
नहीं बहाना नाली में,
मिट्टी वाले दीप जलाना,
अबकी बार दीवाली में।
बने जो अपनी मिट्टी से,
जो दीप बिके बाजारों में,
छिपी है वैज्ञानिकता,
अपने सभी तीज-त्योहारों में।
चायनीज झालर से होकर,
आकर्षित,कीट पतंगे आते हैं,
जबकि दीये में जलकर,
बरसाती कीड़े मर जाते हैं।
कार्तिक और अमावस वाली,
रात न सबकी काली हो।
दीये बनाने वालों के घर भी
अब खुशियों भरी दीवाली हो।
अपने देश का पैसा जाए,
अपने भाई की झोली में।
मिट्टी वाले दीप जलाना,
अबकी बार दीवाली में।
गया जो पैसा दुश्मन देश,
तो लगेगा गोली बारूदों में।
देश की सीमा रहे सुरक्षित
चूक न हो रखवाली में।
धन की बारिश ना भी हो,
रोटी हो सबके थाली में।
मिट्टी वाले दीप जलाना,
अबकी बार दीवाली में।
सीमा पर लड़ने वाली के घर भी,
खुशियां हो घर के चार दिवारी में।
मिट्टी वाले दीप जलाना,
अबकी बार दीवाली में।


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