याद आ गए तुम भुलाते भुलाते,
रो दी यह आँखे मुस्कुराते मुस्कुराते।

तुम भूल जाओ तुम्हे आसान होगा,
आदत में आ गया है तुम्हारी ,
रोज नए चेहरे अपनाते अपनाते।

 तुम तो बस चन्द कदम साथ चले थे,
कर अपना टाइमपास रहे थे,
हम ही जज्बाती हो गए राहों में मिलते मिलाते।

तेरे सारे वादे वफ़ा थे फरेब से भरे,
चाहतों के सारे लम्हें थे कुरेज से भरे,
 तेरे दिए सारे दर्द याद आ गए छुपाते छुपाते।


मेरे पास जो हैं वो ही बेहत्तर है,
उसके ही साथ कटना सारा सफर है,
हम बहुत खुश हुए यह दिल जी समझाते समझाते।



                   अंजू दीक्षित
                   बदायूं उत्तरप्रदेश