इश्क की गली का पता जो मिला दूसरी गली को भूल ही गए ।
राह में इश्क की कितनी मुसीबतें उन्हें झेेल के आगे बढ़ गए।
इज़हार ए इश़्क तुझसे किया, एक हां के लिए तरस ही गए।
तकद़ीर यूं मेहरबां हुई, इज़हारे इश्क से खुश़नुमा हो गए।
तेरे इश्क में यूं खो गए, कितने अपनों से हम ज़ुदा हो गए।
तेरे इश़्क की आदत यूं लगी, ख्यालों मे तुम ही तुम हो गये।
तेरे प्यार ने यूं आबाद किया, फ़लसफा इश़्क समझ से गये।
इश्क़ की खुश़बू महक सी गई, लाखों तारे जगमगा से गए।
इश्क़ से तेरे ज़हां मेरा आबाद है ,मेरे इश्क़ का खुदा तू ही है।
हुस्न भी तू है इश्क़ भी तू है ,जीवन का मेरे अरमान भी तू है।
मौला मेरे!तेरा शुक्रिया,ये नग़ीना मेरी किस्मत में जड़ दिया।
चमक गया घर का हर कोना, दो फूल मुझे तोहफ़े में मिला।
स्नेह लता पाण्डेय
नई दिल्ली

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