आज सालो बाद उसका टेक्स्ट मुझे मिला,उसका टेक्स्ट देखकर दिल में एक अलग सी चुभन महसूस होने लगी।और मैं एक अलग ही दुनिया में खो गई।मैं बहुत प्यार करती थी उससे।बहुत शिद्दत से चाहा था उसे।मेरी हर दुआ में केवल वो ही रहता था।हर सजदे में इस दिल ने उसे ही माँगा था।पर शायद मैं उतनी दीवानगी से उसे नहीं चाह पाई,इसलिए तो वो मुझे तन्हा करके चला गया।

मैंने उससे वजह पूछी तो उसने बताया कि" मुझ पर मेरे परिवार की जिम्मेदारी है,मैं अपने जीवन में बहूत कुछ हासिल करना चाहता हूँ।मैं अभी शादी की जिम्मेदारी लेने के लिए तैयार नहीं हूँ।"
मैं बस उससे इतना कह पाई"क्या तुम्हारे इन्तेजार का हक है मुझे"
वो कुछ जवाब ना देकर वँहा से चला गया।और उसकी खामोशी ने मुझसे इन्तेजार का हक भी छीन लिया।
लोग 8 दिन पहले मिले इंसान को भी कभी नहीं भूलते।वो 8 साल का रिश्ता पल भर में खत्म करके चला गया।
समय अपनी रफ्तार से आगे बढ़ा।मैं एक बच्चे की माँ हूँ।कहने को सब है मेरे पास,अच्छी नौकरी, बहुत प्यार करने वाला पति और एक प्यारी सी बेटी।पर इस श्रुति का एक हिस्सा जो किसी को बेइंतहा चाहता था, इसे वो 8 साल पहले ले गया था।आज भी किसी से प्यार नहीं हो पाया।ना कभी कर पाऊँगी।

आज 8 साल बाद उसके मैसेज का नोटिफिकेशन फेसबुक पर देखा।4 घंटे हो गए नोटिफिकेशन देखे पर हिम्मत नहीं हो रही मैसेज खोल कर पढ़ने की।ऐसे ही 4 घंटे और बीते और मैं घर आ गई।घर पति और बच्ची को खाना बना कर खिलाया।और फिर लैपटॉप खोलकर बैठ गई।अभिषेक पास में आये और हाथ पकड़कर बोले,"श्रुति क्या बात है,क्यों परेशान हो"
"विनीत का मेसेज आया है।"मैंने आँख में आँसु भरकर बोला।

अभिषेक को मैंने शादी के पहले ही सब बता दिया था।क्योंकि मेरे अनुसार कोई भी रिश्ता झूठ की बुनियाद पर नहीं टिकता।फिर भी अभिषेक ने मुझसे शादी की,दिल जो दे बैठे मुझे,पहली नज़र में,ये जानने के बावजूद की मैं मेरा दिल हमेशा के लिए किसी ओर का हो चुका है।वो जानते थे कि मैं विनीत को कभी भी भूल नहीं पाऊँगी, फिर भी उन्होंने मेरा साथ हमेशा दिया।

मैं ये सब सोच रही थी कि"मैसेज खोलकर पढ़ो"अभिषेक की आवाज़ सुनी।
"पर मैं कमजोर पड़ गई तो"मैंने अभिषेक को बोला।
"मेरा प्यार तुम्हें कभी कमज़ोर नहीं पड़ने देखा,मैं जलेबी लेकर आता हूँ,तब तक मेरी श्रुति को खुश कर देना।"अभिषेक ने मेरे सर को चूमते हुए बोला।

वो चले गए,और मैंने अपने काँपते हुए हाथे से मैसेज पर क्लीक किया।एक लंबा सा मैसेज सामने था।
"मेरी श्रुति(जानता हूँ तुम्हें अपना कहने का हक बहुत पहले खो चुका हूँ),
अब तक तो तुमने मेरे बिना जीना सीख लिया होगा।पर मैं आज भी तुम्हें भूल नहीं पाया।तुम्हारा दिल दुखाने की सजा भुगत रहा हूँ।जब तुम्हें छोड़कर गया था तब ये नहीं जानता था कि सफलता हासिल करने के लिए मैं अपनी रूह को खुद से दूर कर रहा हूँ।आज मैं बहुत बड़ा आदमी हूँ।सब कुछ है मेरे पास सिवाय मेरी श्रुति के।जानता हूँ,तुम्हारी शादी हो चुकी है,पर शायद तुम भी मेरे प्यार के बिना अधूरी हो।ये सोचकर तुम्हें मैसेज कर रहा हूँ।क्या तुम मुझसे शादी करोगी।
तुम्हारे जवाब के इंतज़ार में
तुम्हारा विनीत

उसका ये मैसेज पढ़कर आँख फिर से भर आई,कि आज भी इस इंसान को अपनी ही चिंता है।कुछ लोग कभी नहीं बदलते।
अचानक से मेरे सामने अभिषेक का चेहरा आया,और मैंने सोचा कि मैंने इस इंसान के साथ कभी भी सही नहीं किया और इन्होंने बदले में मुझे सिर्फ प्यार दिया।जो अभिषेक ने मुझसे किया वो सच्ची मोहब्बत है।विनीत कभी भी मेरे प्यार के लायक नहीं था,ये बात मुझे समझने में 8 साल लग गए।

मैंने विनीत को जवाब में केवल मेरी,अभिषेक और मेरी बेटी की फ़ोटो भेज दी।जो अपनेआप में विनीत के हर सवाल का जवाब थी।

ये करते ही अभिषेक का इंतजार करने लग गई।जैसे ही अभिषेक आये दौड़कर उनके गले लग गई,और रोने लगी।"श्रुति तुम जानती हो,बस ये ही मैं नहीं देख सकता।"अभिषेक ने मेरे आँसू पोछते हुए बोला।
जवाब में मैंने बस इतने बोला "I love you abhishek..I love u only.."

6 साल में पहली बार मेरे मुँह से ये सुनकर अभिषेक की आँख से आँसू आ गए।उन्होनें बिना कुछ बोले मुझे गले लगा लिया।और आज मैं भी उनसे दूर नहीं होना चाहती थी।



                   प्रीति