तेरा साथ मिला जबसे,
मैं खुद पर इतराती हूं।
सांसों में भरकर तुम को,
तेरे चर्चे सबको सुनाती हूं।
तेरे संग जीवन जीने की,
मैं सपने देखा करती हूं।
रात के खामोशीयों में भी,
तेरा ही गीत सुना करती हूं।।
तुम आए जब से जीवन में,
दिल से दिल का तार जूड़ा।
तुझको चाहा तुझको पूजा,
तुम ही मन का मीत बना।।
जब से तेरा साथ मिला है,
तो दिल की अरमान जगा
तुम मेरी पहचान बना,
और मैं तेरी परछाई बनी।
मन मंदिर में दीप जला कर,
नित तुम को ही देखा करती
तेरे सुन्दर शब्दों के मोती,
रोज ही में चूना करती।।


1 टिप्पणियाँ
लेखन के लिए बहुत-बहुत शुभकामनाएं