तेरा साथ जो छूट गया
हर खुशनुमा लम्हा हमसे रूठ गया

नहीं भाती हैं   रश्म ए  दिनकर की 
उस सुनहरी धूप से नाता टूट गया

सजते थे कभी ख्वाब जो इन आँखों में
उन बहारों का भाना छूट गया

नहीं सुहाते अब चाँद - तारे हमको
धवल चाँदनी में नहाना छूट गया

सजते थे जो सुर सरगम के होंठों पर
उस रागिनी से नाता टूट गया

जीवन की खुशी तुमसे थी "आशा"
तुम जो गए, जीवन का तराना टूट गया


तेरा साथ जो छूट गया
हर खुशनुमा लम्हा हमसे रूठ गया।।




                आशा झा सखी