मुझे भी यह बक्सा देखना है, बताओ ना इस बक्से मैं क्या है ??
इस बक्से मैं कुछ भी हो इससे तुम्हें क्या मतलब गायत्री देवी ने अपनी बड़ी बहू सरला को डांटते हुए कहा |
अगर बक्से में कुछ नहीं है तो आप हमें बता क्यों नहीं रही |
अच्छा बेटा अगर तुम इतनी जिद कर रही हो तो मैं बता ही देती हूँ इस बक्से में मेरे गहने ओर मेरी कुछ एफ, डी रखी है |
और यह सब मैंने अपने बुढ़ापे के लिए बचा कर रखा है , जो बहु मेरे पास रहकर मेरी सेवा करेंगी आखिरी समय में, में यह बक्सा उसी को दूंगी |
जो मेरी सेवा नहीं करेगा उसे तो मैं एक फूटी कौड़ी भी नहीं दूंगी ...
लेकिन अम्मा ये तो नाइंसाफी होंगी |
अरे भाई क्यों नाइंसाफी होंगी... अम्मा ने चिल्लाते हुए कहा...
पर आपकी चीज़ों पर तो दोनों बहुओं का हक फिर यह आप किसी एक को क्यों देना चाहती हो?? सरला ने बात को घुमाते हुए कहा
भले ही मेरी दो बहु है लेकिन मेरी जो सेवा करेगा उसे ही मैं यह की बक्से की चाबी दूंगी |
लेकिन अम्मा ये तो नाइंसाफी है आप तो अच्छी तरह से जानते हो कि आपके बड़े बेटे की नौकरी बाहर शहर मे हैं और मैं तो चाहती हूँ आप हमारे साथ चलो लेकिन आप ही यह गाँव छोड़ कर जाना नहीं चाहती।
बेटा .....
सेवा करने वाला गांव आकर भी माँ बाप की सेवा कर सकता है |
लेकिन वो तो तुमसे होंगी नहीं |
यही मेरा आखिरी फैसला है जो मेरी अंतिम समय में सेवा करेगा यह बक्सा उसी को मिलेगां
लेकिन यह तो अन्याय है हम बता रहे है गुस्से से मुह फुलाती हुई सरला ने कहा. . ..
बात की गंभीरता समझते हुए शीतल बीच में बोल पडी़..
अरे जीजी आप भी कहां अम्मा की बातों में आ रही हो
। आप चाहे तो इसे अभी ले सकते हो मुझे कोई परेशानी नहीं होंगी लेकिन फिलहाल यहां बक्सा अम्माँ का है , और अभी इस बात पर बहस ना करो...
ठीक है , अगर तुम इतना कह रही हो तो तुम्हारी बात मान लेते है |
लेकिन बता रहे हैं अगर तुमने मेरा हक छिनने की कोशिश करी तो मुझसे बुरा कोई नहीं होगा |
अरे जीजी आप चिंता मत करिए |
हम आपका हिस्सा नहीं लेंगे |
गायत्री देवी की दो बहुएं हैं बड़ी बहु सरला और छोटी बहु शीतल |
वेसे तो दोनों ही बहु अच्छी है |
लेकिन शीतल की तो बात ही कुछ और हैं |
गायत्री देवी का बड़ा बेटा शहर में बिजली विभाग मे उच्च पद पर कार्यरत है ,
वहीं छोटा बेटा भी इंजीनियर हैं लेकिन वह आधुनिक तकनीक से कृषि करना चाहता है इसीलिए वह अपने गाँव में किसान है|
आपने मिट्टी से जुड़ाव के कारण ही गायत्री देवी भी अपने गांव को छोड़ कर शहर नहीं जाना चाहती है |
इसलिए वह भी यही अपने छोटे बेटा बहू के पास रहती है |
देखते ही देखते हैं दो साल बीत जाते हैं ,
और एक दिन अचानक से हृदय घात के द्वारा गायत्री देवी का आकस्मिक निधन हो जाता है |
गायत्री देवी के अंतिम संस्कार ओर बारह दिन के मृत्यु कार्यक्रम के बाद बड़ी बहुत सरला, शीतल से बक्से की चाबी मांगती हैं शीतला अम्मा के कमरे से वह चाबी निकालकर सरला को दे देती हैं |
उस बक्से को खोलने के बाद सरला गुस्से में बड़बड़ाती हुई सारा परिवार इकट्ठा कर लेती हैँ
अम्मा ने हम सबसे झूठ कहां देखो इस बक्से में अम्मा ने क्या इकट्ठा कर रखा है??
सबकी नज़र उस बक्से पर जाती हैं, उस बक्से के अंदर पत्थर रखे होते हैं |
शीतल उन पत्थरो को हटाकर बाहर फेंक देती है तभी उसकी नज़र पत्थरों के नीचे दबे हुए एक खत पर जाती हैं |
शीतल उस खत को पढ़ने लग जाती हैं|
प्रिय सरला मैं जानती हूँ कि यह बक्सा तुम ही खोलोंगी।
इसका कारण यह नहीं कि तुम्हारे मन में कोई लालच है इसका कारण तुम्हारा जिज्ञासु होना है। मैं जानती हूँ तुम्हे भेदभाव पसंद नहीं है
लेकिन शीतल के साथ रहते हुए मुझे आज सात साल से भी ज्यादा हो गये हे, शीतल ने आज तक मुझ से बक्से का जिक्र कभी नहीं किया |
और मैं ने बात भी निकाली तो शीतल ने यह कहकर बात टाल दी अम्माँ आपका बक्सा आप सरला जीजी को ही दे देना मुझे सिर्फ आपका आशीर्वाद चाहिए |
मैं जानती हूँ कि ये पत्थर देखकर तुम्हें गुस्सा आयेगा और तुम सोचोंगे की अम्मा ने आखिर हमसे झूठ क्यों बोला ..
यही तो में तुम सब के धैर्य की परीक्षा है और मैं अच्छी तरह से जानती हूँ , इस परीक्षा में भी शीतल ही पास होंगी |
मेरी आखिरी इच्छा यही है, मेरे बक्से के आखिरी में एक चाबी है , तभी सरला दौड़ती हुई वह चाबी उठा लेती है।
यह गोदरेज के लॉकर की चाबी है उसमें मेरे गहने है और, कुछ जरूरी एफ डी है |
यह सब मे तुम दोनों को देना चाहती हूँ मैं अपनी दोनों बहुओ में भेदभाव नहीं करती |
लेकिन यह मेरी दिली इच्छा है कि मेरे पुश्तैनी अंगुठी शीतल को बाकी की सारी जो तुम चाहे ले सकती हो...
ख़त पढ़ते हुए शीतल रोने लगती है |
और अम्मा की गोदरेज से एक बैग निकाल कर सरला के हाथ में दे देती है |
काजल हर्ष

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