❤️️कह दिया था❤️
❤️ दिन बड़ी बेरुखी से ❤️
          ❤️कि मुझे तेरी जरूरत नहीं❤️

❤️️️आज  पहलू में हो यूं   बैठे❤️
️❤️जैसे मेरे सिवा तेरा कोई और नहीं।♥️

     ️♥️️तुम जो  चाहे कुछ भी  सोचो ❤️
     ️❤️पर  है  मुझे   इतना  यकीन।♥️

❤️  साथ  मेरे रहते रहते    ❤️
    ️♥️ तुम्हें लग गई  है लत मेरी।❤

❤️उस दिन तो तुमने कह दिया था ❤️ ️    
♥️मेरा दिल तुमसे भर गया अब♥️ 

     ❤️️ देखकर कैसे   मुझे,  तेरा ❤️
           ♥️️ खोया चेहरा खिल गया अब♥️

      ❤️तुम चाहे मानो या ना मानो❤️
             ♥️रहती है मुझको फिकर तेरी♥️

     ❤️देखकर तुम्हें मैं भी तो खिल गई।❤️
       ♥️मुझे भी तो तेरी लत लग ही गई।।♥️

        स्नेहलता पाण्डेय
             नई दिल्ली
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