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किस मिट्टी के बने हो तुम
दिखने में तो कठोर हो तुम
दिल से लेकिन नरम हो तुम
पूरी कमाई,अपनो पर लुटाते हो तुम
ईतना बङा दिल कहा से लाते हो तुम
खुद तो पहनते हो नॉर्मल, हमको ब्रांडेड पहनाते हो तुम
जिम,कसरत,सब छोड़ दी, सारा टाइम ऑफिस में ही बिताते हो तुम
इस भागदौड़ की दुनिया में, टाइम अपने लिए ही नहीं ला पाते हो तुम
बाल तुम्हारे सब झड़ गए, पेट तुम्हारा निकल गया
पर्सनैलिटी हो गई अब जीरो, रूप रंग सब बदल गया
40 की उम्र के पड़ाव में ,50 के दिखने लगते हो
इन सब की तुम परवाह ना करके, बच्चों पर पर जान लुटाते हो
सोचती हूं बार-बार मैं, इतना बड़ा दिल कहां से लाते हो
दुनिया भर की टेंशन को, बाहर छोड़ कर आते हो
हम सबकी तुम परवाह करके,घर में नहीं बताते हो
सच कहते हैं पिता है रौनक, पिता से ही घर में है बरकत
मैं तो ,रो लेती हूं, जी भर कर ,मन भारी जब होता है
लेकिन,मन जब तुम्हारा भारी होता, तुम आंसू कहां छुपाते हो
सोचती हूं, बार-बार मैं, इतना बड़ा दिल कहां से लाते हो
संगीता वर्मा ✍✍

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