मेरी गुड़िया,
मेरी खुशियों की पुड़िया,
उसी ने थाम रखी है,
मेरे इस अजीबोगरीब ज़ीवन की नैय्या..

उसकी खिलखिलाती हँसी में,
मेरे साँसों की डोर है फसी..

उसकी बे सिर पैर की बातें,
के आगे लगते है फीके,
दुनियां के हर नाते..

तेरे होने से,
ज़ी उठती हूँ मैं,
कुछ भी हो जाए,
फिर भी,
खिल उठती हूँ मैं..

तेरा है मेरी रूह से नाता,
जँहा पर हर कोई नहीं पहुंच पाता..

तू रहे खुश सदा,
बस यही है मेरी,
पहली और आखिरी मान्नता..

प्रीति