काली अंधेरी रात में दबे पांव जा रहा था
भारी बारिश में भी वो कुछ सोच रहा था
कुछ तो चिंता थी उसको
बचा रहा था वो जिसको  
पीछे पीछे बिना कुछ कहे 
कांटे पत्थर सब सहे 
बस उसके पीछे लगा जा रहा था
काली अंधेरी रात में दबे पांव जा रहा था 

रोककर रास्ते में किसी ने पूछा उसको
भाई कहाँ जा रहे हो 
और कौन है वो 
जिसका पीछा तुम कर रहे हो
सुनकर आ गया उसकी आंखों में आंसू
अब ना कर पाऊंगा खुद को काबू 

मजबूर हूँ तकदीर के आगे 
अब सुनो उससे जो किए थे बादे 
कहा था उसको 
हरदम साथ निभाऊंगा
छोड़ बीच मझदार में तुझको
मैं कहीं ना जाऊंगा 
अच्छे अच्छे सपने तू देख
उनको पूरा मैं करवाऊंगा
धरती से आसमान में
उड़ने के लिए 
तेरे पंख मैं खुद बनाऊंगा 
तू उड़ जा मेरे लाल  
पीछे से धक्का मैं लगाऊंगा 

समय ने अपना पहिया घुमाया 
मजबूर हो तुम सब मेरे आगे 
ऐसा पाठ सिखाया।


होनी से अनहोनी हुई
उस रात जिंदगी के  साथ 
बहुत बड़ी बेईमानी हुई 
नहीं पता था कल क्या होगा
सुबह का नज़ारा कहाँ होगा
सोया था उस रात 
अपने बेटे के साथ 
रखकर उसका 
अपने हाथों में हाथ

हार्ट अटैक ने किया मुझ पर वार  
छोड़ गया मैं नन्हे को  दुनिया के इस पार  😢
सुबह उठकर नन्हे ने मुझे उठाया  
मजबूरी मेरी रही कि 
मैं चाह कर भी उठ न पाया
सुबक सुबक का बच्चा रोया 
क्यों उसने पिता को खोया।
रो रोकर अपने सपनों को मारा
कोई नहीं मेरा इस दुनिया में 
अब कहलाऊंगा बस मैं बेसहारा

नहीं जनता वो ये बात 
पिता का साया है उसके साथ   
एक नई राह दिखलाई 
नया मुकाम बनवाया
नन्हे को फिर जीना सिखाया।

18 बरस हुए इस बात को 
अब भी चलता हूँ 
इसके साथ हर रात को
जब भी इस पर मुसीबत आयेगी
मुझसे हार कर ही जाएगी
हूँ मैं इसके पिता का साया 
जो दूसरी दुनिया से भागकर आया 
जो वादा मैं पूरा न कर पाया 
उसके लिए ही मैं धरती पर आया 
मैं हूँ पिता का साया
मैं हूँ पिता का साया।





          अंतिमा बंसल😊