इस गुलाब में .....
तेरे  एहसास अभी भी जिंदा है
 जो तुमने कभी यूं हीं दे दिया था।

इस गुलाब में  तेरी खुशबू........
अभी तक  मौजूद है।
 जिसे तुमने  कभी यूं हीं छू लिया था ।

इस गुलाब को..........
अभी भी मैं  उसी शिद्दत से देखता हूं।
 जिसे तुमने  कभी  यूं ही देख लिया था।

 वो घाव............
 चुभते भी नहीं अब।
 जो तूने कभी लफ्जों से यूं हीं दे दिया था।
 
 
तेरी  कही हर वो बात,
 याद है अभी तक ।
 जो तुमनेे कभी यूं हीं कह दिया था।
   
तेरे कड़ेे के उस कांच को,
 अभी  भी संभाल के रखा है।
  जो कभी तुझसे यूं हीं टूट गया था।
 
 तेरी हर उस मुस्कुराहट को.
 दिल में बसा के रखा है।
 किसी बात पर तुमने यूं हीं मुस्कुरा दिया था।
 
आज भी हर वो चीज,
 मेरे लिए खास है ।
 जो कभी तुमने यूं हीं कर दिया था। 
  
तेरी वो  हर अदा ,
अभी भी बेकरार करती है।
जिसे कभी तुमने  यूं हीं ढा दिया था।

तेरे पायल की खनक.
अब भी कानों में गूँजते है।
जिसे कभी तुम्हें यूं हीं खनका दिया था।

तेरे उस रुप को ,
दिल मेंं बसा के रखा है।
 जिसे कभी तुमने यूं हीं संवार लिया था।


 तेरी लिखी हुई कविता को,
 दिन में  इतनी बार पढ़ता हूं।
जो तूने कभी यूं हीं लिख दिया था ।

 तेरे कलम की स्याही,
 आज तक सुखी नहीं है ।
 जो कभी तुमनें मुझ यू हीं दे दिया था।

भूल जाना मुझे......
और हमेशा आबाद रहना, ,
कभी तुमने यूं हीं कह दिया था।

तेरी इस कसम .......
को निभा ना सका,
जो कभी तुमने मुझे यूं हीं दे दिया था।

तेरा हर वो यूं ही..........
मेरा सब कुछ बन चुका है।
जो कभी तुमने यूं हीं कर दिया था।




स्नेह लता पाण्डेय
          नई दिल्ली