बातों बातों में,... बढ़ती दूरी?
पल दो पल की बात है,
दिन है या रात है!
पल दो पल की सौगात है,
खुशियों की बरसात है!

खवाब में भी नहीं सोचा था,
कभी ऐसा दिन आयेगा।
तुम पास होकर भी पास नहीं होगे,
बोलने के लिए कोई शब्द नहीं होगे।
 विश्वाश की डोर इतनी कच्ची होगी,
जो इतनी आसानी से टूट गई!

रिश्तों की कड़वाहट बढ़ती जायेगी,
तुम अपना होके भी कभी अपने नहीं रहे!
 एहसास दिल में जिंदा है!
पर जुबान कड़वी हो गई,
अहम दिल की आवाज़ से बड़ी हो गई।
बातो बातो मे तुम दूर हो गए
      
              लक्ष्मणी खरे 🖌️