तुम्हारे बिन यहाँ यारा ,
हम दिल हार बैठे है।
वहाँ तन्हा हो तुम यारा,
यहाँ बेकार बैठे है।।
-१-
राहे उल्फत की'
बेगार सूनी है।
तुम मिलने को आ,
हम बेजार बैठे है।
- २-
फलक से झाँकती है,
रोशनी बेकरार रातो से।
ले चलो चाँद तारो मे ,
हम तैयार बैठे है।।
- ३-
तुम जब भी मिले"
की तकरार झूठी है।
मना लो फिर से अब'
हम दिल हार बैठे है।।
-४-
गले मे डालकर बाँहे'
नये अरमाँ जगा दो तुम!
सुन लो मनुहार अब यारा,
करके हम प्यार बैठे है।।
- ५-
न कुछ सोचा न कुछ चाहा"
लगाया दिल जब से यारा।
तुम्हारी चाहतो मे खुद ,
को हम कर बदनाम बैठे है।।
रीमा महेन्द्र ठाकुर(लेखिका)
रानापुर झाबुआ मध्यप्रदेश

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