था मेरा चेहरा भी खूबसूरत इतना
ना था कहीं कोई भी बराबर इतना
इतराती थी मैं भी तितली की तरह
कभी चिड़िया तो कभी हिरनी की तरह
सोचती थी मैं आएगा एक राजकुमार
दूँगी मैं उसपे अपना तन मन वार
पर जो आया वो ना दिल को भाया
उसके प्रेम प्रस्ताव को मैंने ठुकराया
हुई थी मुझसे बस इतनी सी खता
उम्र भर की दी उसने मुझको सजा
मैं अल्हड़ सी मस्ती में चले जा रही थी
मेरी किस्मत भी मुझे हराने चली आ रही थी
वो आया मेरी ओर लिए हाथ में बोतल
कहा, है जो तुझे प्यार तो साथ मेरे चल
मैं बोली कि मुझे नही जाना तेरे साथ
उसने भी चेहरे पे मेरे गिराया फिर तेजाब
तड़पी मैं इतना नही सोचा था जितना
ना जाना फिर उसने कि मुझे दर्द है कितना
मिले जो जख्म वो सहे ना गए मुझसे
क्या यही तेरे प्यार का तोहफा मिला है तुझसे
क्या यही तेरा प्यार यही चाहत थी मेरे लिए
जो ना बनी मैं तेरी तो छोड़ा नही किसी के लिए
कोमल भलेश्वर,
यमुना नगर ,हरियाणा

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