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दोस्तों ये कहानी प्यार:एक जिस्मानी रिश्ता??? के आगे का सफर है,अगर आप इसके पहले की कहानी जानना चाहते है तो मेरी कहानी प्यार:एक जिस्मानी रिश्ता??? जाकर पढ़ सकते है।
रीति अपने अतीत को याद करते हुए,पता नहीं कितने सिगरेट पीती जाती है।उसे ऐसे रेलिंग पर खड़े 2 घंटे से अधिक हो जाते है।उसी समय रवि आकर बोलता है,"रीति तुझे सर बुला रहे है।"
उसने रवि को बोला,"तुम जाओ,मैं आती हूँ।"
रीति को देखकर रवि समझ जाता है,कि रीति रो रही थी,उससे रहा नहीं गया,और उसने रीति से पूछ ही लिया,"आर यु ओके रीति??"
"या,आई एम।"रीति ने उसे इतना जवाब दिया,और वंहा से निकल गई।
रीति के इस रूखे बर्ताव से रवि आहत हुआ।वो रीति को बहुत पसंद करता था,उसने बहुत बार चाहा कि रीति उससे बात करे,उसके साथ खुले,लेकिन रीति आफिस में किसी से भी काम के अलावा कोई बात नहीं करती थी।उसको देखकर ऐसा लगता था कि जैसे उसे किसी के होने नही होने से कोई फर्क ही नहीं पड़ता हो।
रीति वंहा से निकलकर वाशरूम में जाकर अपना मुंह धोया,और वंहा से निकलकर वो जैसे ही आफिस की ओर बड़ रही थी,कोई सामने से आकर उससे टकरा गया।वो गिरने ही वाली थी कि किसी ने उसे थाम लिया,जिसने उसे थामा था,उसने उसका एक हाथ से रीति का हाथ पकड़ रखा था,और दूसरा हाथ रीति की कमर पर था।गिरने के कारण रीति का जुड़ा बिगड़ चुका था,उसके लंबे बाल रीति के चेहरे को छू रहे थे। रीति के लंबे बाल,काली गहरी आंखे,गौरा रंग,होठो के नीचे काला तील उसके होश उड़ा रहा था।वो रीति में इस कदर खो गया कि उसे कुछ भी ध्यान नहीं रहा था।रीति ने उसको एक नज़र देखा,लंबा कद,सांवला रंग,नीली आंखे,जेंटलमैन जैसे कपड़े,हल्की दाढ़ी,ये सब उसे एक गंभीर और आकर्षक व्यक्तित्व का स्वामी बनाता था।
रीति ने उसे धक्का दिया,और वंहा से चली गई।वो उसे जाते हुए देखता रहा।रीति वँहा से बॉस के केबिन की ओर चली गई।वो भी उसके बॉस के केबिन की ओर चला गया।
"सर,आपने बुलाया"रीति केबिन में घुसते हुए बोली।
"हाँ, रीति अंदर आओ,मैंने तुम्हें किसी जरूरी काम स बुलाया है।"
उतनी देर में वो लड़का भी केबिन खोलकर बोला,"मे आई गेट इन सर??"
"आओ मानस, अंदर आओ।"बॉस ने मानस को बोला।
रीति ने उसे देखा तो सोचा, तो इन महाशय का नाम ममानस है।पर ये है कौन,और सर ने इन्हें मेरे साथ यँहा क्यों बुलाया।
"रीति ये है हमारे न्यू प्रोजेक्ट इंचार्ज मिस्टर मानस रॉय।"बॉस ने बोला,तो रीति ने मानस की तरफ देखकर फॉर्मल स्माइल दी।
"मानस ये है हमारी कंपनी की सबसे होनहार एम्प्लॉयी और finanace advisior मिस रीति शुक्ला।"बॉस ने बोला।
"हेलो मिस रीति,nice to meet u.."मानस ने बड़े जोश के साथ बोला,और हाथ मिलाने के लिए आगे बढ़ाया।
रीति ने उसे इग्नोर कर दिया और सर से बोली,"सर आपने किसी काम के लिए बुलाया था????"
"हाँ रीति,तुम्हे और मानस को आज ही बंगलोर के लिए निकलना है।वंहा कुछ 20 दिन का काम है,तुम दोनों प्रोजेक्ट कम्पलीट करके ही जयपुर वापिस लौटोगे।"सर ने आर्डर दिया।
"पर सर बंगलोर,I mean,can I work from here,mr.manas will update me and I will work accordingly.."रीति ने बोला।
"no reeti..u have to go..and that's my order..get it??"बॉस ने बोला।
"ok sir.."रीति ने जवाब दिया।
इतना बोलकर रीति वंहा से निकल गई।मिस्टर रॉय यानी की रीति के बॉस मानस को देखकर बोले,"बरखोदार,अब 20 दिन है तुम्हारे पास,रीति के मन में प्यार जगाने के लिए।"
"thanx paa..u r worlds best paa..I love u so much.."मानस मिस्टर रॉय के गले लगते हुए बोला।
"no buttering maans..जाओ जाकर पैकिंग करो,और हा, ये भी याद रखना,ये प्रोजेक्ट किसी भी हाल में सक्सेस होना चाहिए,इसलिए काम भी करना है,ये मत भूलना।"मिस्टर रॉय बोला।
"u don't worry paa..I will manage everything.."मानस बोला,और वंहा से चले गया।
मानस और रीति शाम की फ्लाइट से बंगलोर के लिए निकल गए।रास्ते में मानस ने रीति से बात करने की बहुत कोशिश की,लेकिन रीति उसकी बात का हाँ या ना में ही जवाब देती।
रीति चोर निगाहों से बार बार मानस को देखती और मन ही मन सोचती,इसे मैंने कंही तो देखा है,पर कँहा,ये याद नहीं आ रहा।
"तुम चाहो तो मुझे डायरेक्टली भी घूर सकती हो,मुझे कोई ऐतराज नहीं है।"मानस ने आंख विंक करते हुए बोला।
मानस की बात सुनकर रीति झेंप गई,और बोली,"अपने काम से काम रखो,मुझसे उलझने की जरूरत नहीं है।"
रीति के रूखे बर्ताव से,मानस ने अपना सर सीट पर टिका लिया,और सोचने लगा,"तुम यही सोच रही हो ना कि तुमने मुझे देखा है कंही,मैं हमेशा से तुम्हारे आस पास ही रहा हूँ,होल्कर साइंस कॉलेज में था।पर तुम उस हर्ष के झूठे प्यार में इस तरह खो गई थी तुम्हे किसी का रूहानी इश्क़ दिखा ही नहीं।ये सब सोचते सोचते मानस की आंख से आँसू निकल गए,और उसने उसे धीरे से पोछ दिया।
वो दोनों बंगलोर पहुँच गए उन्होंने एक अच्छी से होटल में दो कमरे 20 दिन के लिए बुक करा लिए थे।वो दूसरे दिन से ही काम में लग गए,मानस बीच बीच में हँसी मज़ाक करता था,कभी रीति हंसती,कभी उसे दांत देती,पर मानस कभी भी बुरा नहीं मानता था।वो चाहता था कि रीति अपने अतीत को भूलकर आगे बड़े।20 दिन होने को आए थे,उन दोनों ने मिलकर काम को अच्छे से अंजाम दिया था।रीति अब मानस से खुलने लगी थी,वो समझ चुकी थी कि मानस एक अच्छा इंसान है,उसे अब मानस की बात का बुरा नहीं लगता था।
मानस भी रीति को खुश देखकर,खुश हो जाता था,पर वो जानता था कि रीति अभी भी अपने अतीत को मन में लेकर बैठी है।रीति को अपने अतीत से बाहर निकालने के लिए मानस ने कुछ प्लान किया था, जिसको excute करने का समय आ गया था।
उस दिन जैसे ही वो लोग आफिस से होटल लौटे तो मानस ने रीति से बोला,"रीति हमारे बंगलोर वाले क्लाइंट ने आज शाम को पार्टी रखी है,हमे भी बुलाया है, 8.30 तक रेडी रहना।"
"नहीं मानस,मैं पार्टीज नहीं करती,तुम जा सकते हो।"रीति ने बोला।
"तुम्हे नहीं आना है तो मत आना लेकिन कंही ऐसा ना हो कि इससे हमारे प्रोजेक्ट पर असर हो।आगे तुम्हारी मर्जी।"मानस बोला।
रीति कुछ देर सोचती रही फिर बोली,"ठीक है,चलती हूँ।"इतना बोलकर वो अपने रूम में चली गई।
रीति के रूम में जाने के बाद ही मानस खुद से बोला,"बस कुछ देर ओर,फिर तुम्हारे दिमाग से हर्ष हमेशा हमेशा के लिए दूर हो जाएगा।उसके बाद फिर मैं तुम्हे मेरा पूरा सच बता दूँगा,फिर चाहे तो तुम मुझसे कोई रिश्ता रखना, और अगर नहीं तो मैं कंही बहुत दूर चला जाऊंगा।
रात में 8.30 बजे मानस उसे लेने आया,वो जैसे ही बहार निकली,मानस एक मिनट के लिए सब कुछ भूलकर केवल उसमे ही खो गया था।रीति ने ब्लैक कलर का वनपीस जो कि बैकलेस था, रीति आज बहुत ही हॉट लग रही थी।उसने बाल को खुला रखा था,आँखो में काजल और रेड कलर की लिपस्टिक लगा रखी थी।
"मानस कँहा खोए हुए हो,कब से आवाज़ लगा रही हूँ।"रीति ने बोला।
"कुछ नहीं,आज बहुत ही सुंदर लग रही हो।"मानस ने इतना बोलते ही अपने दिल पर हाथ रख दिया,और महसूस किया कि ये बहुत जोरो से धड़क रहा है।
"कंही ओर ट्राय करना,आज यँहा तुम्हारी दाल नहीं गलने वाली।"रीति ने हँसते हुए बोला।
"अच्छा,मुझे अपनी दाल क्या चावल भी नहीं गलवाने,अब चले।"उसने ऐसा बोलते ही,कार का दरवाज़ा उसके लिए खोल दिया।
वो थोड़ी देर में ताज होटल पहुंचे,पहले मानस गाड़ी में से उतरा, और रीति के लिए गेट खोल दिया,वो बहार निकली तो,उसके आगे एक हाथ आगे करा,और बोला,"may I??"
रीति कुछ देर उसके हाथ को देखती रही फिर उसके हाथ मे अपना हाथ देती हुई बोली,"sure."
मानस रीति का हाथ पकड़े,आगे चला जा रहा था,और रीति उसके साथ चले जा रही थीं।वो दोनों जैसे ही पार्टी में पहुँचे, सभी लोग रीति और मानस को ही देखे जा रहे थे,दोनो साथ मे एक दम made for each other लग रहे थे।
उन दोनों से सबसे फॉर्मल बाते की।उस पार्टी में दो जोड़ी आंखे कब से रीति को देखे जा रही थी,उसने फिर एक वेटर को बुलाया,उसको कुछ पैसे देते हुए,उसके कान में कुछ बोला।
वो वेटर जँहा रीति थी,वंहा गया,और जानबूझकर उसके कपड़ो पर ड्रिंक गिरा दी,और फिर बोलने लगा,"सॉरी मैडम,गलती से हो गया।"
"it's ok.."रीति इतना बोलकर,मानस को इशारा करके वाशरूम की ओर बढ़ गई।
वो जैसे ही वाशरूम से बाहर निकली,उसे किसी की जानी पहचानी आवाज़ सुनाई दी।कोई बोला,"हेलो रीति।"उसने पीछे मुड़कर देखा तो हर्ष खड़ा था।उसने जैसे हर्ष को देखा,उसे घबराहट होने लगी,वो वँहा से चली गई।
रीति बहार आकर,मानस का हाथ पकड़कर बोली,"चलो यँहा से।"
"अरे पर हुआ क्या,पहले कुछ बताओ।"मानस सब जानकर भी अनजान बनते हुए बोला।
"जब मैंने कहा,चलो यँहा से,तो चलो।एक बार मे कोई बात समझ नहीं आती क्या??"उसने जोर से चिल्लाते हुए बोला।रीति की आवाज़ सुनकर सभी उसकी तरफ देखने लगे।वो मानस का हाथ पकड़कर वँहा से चल दी।
"कँहा चल दी,मिस रीति,लगता है कोई नया मिल गया।मुझे तो लगा था कि मुझे भूली नहीं होगी अभी तक,पर तुमने तो कोई ढूंढ भी लिया।"हर्ष जाती हुई रीति को बोला।
रीति उसकी आवाज़ सुनकर,वंही खड़ी हो गई,और जोर जोर से सांसे लेने लगी।वो जाने के लिए आगे बड़ी, तो मानस ने उसे बोला,"रीति आज उसे जवाब देकर जाओ,अगर आज भी चुप रह गई,तो ज़िन्दगी के उन पन्नो को तुम कभी भी भूला नहीं पाओगी।"
मानस की बात सुनकर,रीति ने उसे सवाल भरी नज़रों से देखा,वो समझ चुकी थी कि मानस मेरी अतीत के बारे में सब जानता है।रीति को अपनी तरफ ऐसे देखते हुए,मानस बोला,"सब सवालों के जवाब दूँगा,पहले तुम उसको जवाब दो।"मानस की आवाज़ में एक अपनापन था,जिससे रीति के कदम अपने आप हर्ष की ओर बड़ गए।
"मैंने कोई नया ढूंढा,या नहीं,इससे तुम्हारा कोई लेना देना नहीं है हर्ष अग्रवाल।"रीति ने गुस्से में हर्ष को देखते हुए बोला।
"तुम आज भी उतनी खूबसूरत हो,जितनी पहली थी।क्यों ना एक बार उन पुरानी यादों को ताजा किया जाए।"हर्ष ऐसा बोलते हुए,उसकी बालो को सहलाने लगा ।
रीति से उसकी ये हरकत सहन नहीं हुई,तो उसने हर्ष का हाथ झटका और एक थप्पड़ जोर से हर्ष के गाल पर रसीद दिया।
रीति के हाथ से थप्पड़ खाकर, हर्ष बौखला गया,वो बोला,"कल तुम मेरे बिस्तर गर्म करती थी,और आज तुम्हारी इतनी हिम्मत की,तुम मुझ पर हाथ उठाओ।तुम्हे तो मैंने रौंद कर फेंक दिया था,और करता भी क्या,कब तक झेलता,जो चाहिए था वो तो मिल गया था।उसी समय मेरे बॉस की लड़की पटा ली,और अपनी लाइफ तो सेट हो गई।"
उसने इतना बोला ही था कि उसे फिर से एक थप्पड़ पड़ा, उसने देखा,सान्वी खड़ी थी, वो बोली,"how dare u to play with emotions of a girl.."इतना बोलकर वो जाने लगी,फिर रुककर बोली,"डिवॉर्स पेपर भिजवा दूँगी,sign कर देना।"
"दो थप्पड़ से पेट भर गया या अभी कोटा बचा है,जस्ट गेट आउट फ्रॉम हियर"मानस जोर से चिल्लाया।
हर्ष वँहा से चला गया।उसके जाने के बाद,रीति बहुत देर तक मानस के गले लगकर रोती रही।जब उसे होश आया,तो वो झेंप गई,और उससे दूर हो गई और बोली,"कौन हो तुम।"
मानस हँसते हुए बोला,"मैं वो जो एक लड़की को पिछले 8 साल से पागलो की तरह चाहता हूँ,ये जानते हुए कि उस लड़की के लिए मैं कुछ नहीं हूँ।मैं मानस रॉय,होलकर साइंस कॉलेज में तुम्हारा बैचमेट था,पर तुमने मेरी तरफ कभी ध्यान ही नहीं दिया,और मैं तुम्हारे अलावा किसी ओर को देख ही नहीं पाया।जब से होश संभाला,सिर्फ तुम्ही को चाहा है।"इतना बोलकर मानस की आंख से आँसू निकल आए।
वो दोनों कितनी देर तक पुरानी बातें याद करते रहे।उसने रीति को बताया कि मिस्टर रॉय उसके पापा है,साथ मे ये भी बताया कि उसने जानबूझकर हर्ष को उसके सामने लाया ताकि तुम उसे भूल आगे बढ़ सको।वो बोला,"मैं तुम्हें बहुत चाहता हूँ,लेकिन अगर तुम नहीं चाहती कि मैं तुम्हारी लाइफ में रहू तो मैं अभी इसी वक्त तुमसे दूर हो जाऊंगा।"इतना बोलकर वो जवाब के लिए रीति की तरफ देखने लगा।
"देखो मानस,प्यार का तो मुझे नहीं पता, लेकिन मैं इस रिश्ते को एक मौका देना चाहती हूं।"इतना बोलेकर वो मानस के गले लग गई।
फिर रीति मानस से दूर हटते हुए बोली,"एक बात बताओ,इतने साल,मेरे मिलने की कोई आस नहीं थी तब तुम्हारे मन में मुझे लेकर प्यार कम नहीं हुआ।"
मानस उसकी बात सुनकर मुस्कुराते हुए बोला,"मेरा प्यार रूहानी है,मैंने तुम्हारी रूह को चाहा है।ये मेरा तुमसे रूहानी रिश्ता है,जो किसी भी जिस्मानी रिश्ते से बहुत बढ़कर है।"
प्रीति

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