शारदा और गिरीश की शादी को दस साल हो चुके है |
गिरीश एक डाक्टर (गायनोलॉजिस्ट) है |
लेकिन आज भी वह दोनों संतान सुख से वंचित है | जिसकी मुख्य वजह गिरीश स्वयं है |
क्योंकि यह उसकी इच्छा ही है, उसके घर मे पुत्र आये |
इसी कारण वह शारदा के दो - तीन गर्भपात भी करवा चुका है |
आज वह दस साल बाद पूरी संतुष्टिकरण के साथ ही पुत्र की उत्पत्ति ही होंगी |
इसीलिए गिरिश ने शारदा की प्रेग्नेंसी को जारी रखा है |
क्या हुआ तुम इतनी उदास क्यों हो??.
गिरिश ने अपनी शारदा से कहा..
पता नहीं जी आज मेरा मन बहुत बेचैन हो रहा है |
जब से हम इस घर में आये है तब से ही मुझे बहुत बेचैनी हो रही है |
और अब तो यह पैरों की सूजन कम होने का नाम ही नहीं ले रही है |
ऐसा कुछ नहीं है बिल्कुल बढ़िया घर तो है यह
ओर हां शारदा प्रेग्नेंसी के कारण तुम्हारा वजन बढ़ गया है इसलिए तुम्हारे पैरों में सूजन भी आ गई है |
यह लो तकिया और इसे पैरों के नीचे लगाओ
सोने की कोशिश करो..
मुझे नींद नहीं आ रही है , लेकिन क्यों ??
रात के दस बजे रहे हैं और तुम्हें नींद नहीं आ रही |
मन मैं अजीब सी बेचैनी हो रही है शारदा ने कहा
मैं एक काम करता हूँ कमरे की खिड़की खोल लेता हूँ तुम थोड़ी देर टहल लो...
नहीं मुझे नहीं टहलना ...
शारदा ने चिढ़ते हुए कहाँ..
ठीक है कोई बात नहीं जैसे तुम्हारी मर्जी !
में सो रहा हूँ गुडनाइट..
सुनो क्या हम कुछ देर बात कर सकते हैं |
हां हां क्यों नहीं...
बताओ क्या कहना चाह रही हो..
जी आपको क्या चाहिए??
शारदा खिलखिलाकर हँस पड़ती है |
बताओ ना..
शारदा ठहाका लगाकर हंसने लग जाती है गिरीश कोई जवाब नहीं देता है |
बस मुस्कुरा देता हूँ
क्या कर रही हो शारदा तुम्हे पता है ना माँ बगल वाले कमरे में सोई है |
शारदा गिरिश के सीने से लग जाती है।
दोनों बातें करने में मशगूल होते हैं | तभी दोनों की नजर खिड़की पर जाती है |
एक साया या परछाई या काली आक्रति कह लीजिए शारदा के कमरे से होते हुई निकल जाती है |
दोनों कहते हैं यह मम्मी भी ना कभी - कभी डरा ही देती है |
ओर वह दोनों मम्मी के कमरे में चले जाते हैं |
पर दोनों के आश्चर्य का ठिकाना नहीं रहता मम्मी कमरे में गहरी नींद सो रही है |
डर के मारे हाफते - हाफते शारदा कमरे में आ जाती है |
और करवट बदल कर लेट जाती है |
शारदा तुम घबराओ मत शायद यह हमारा वहम होंगा |
अच्छा यह सब तो ठीक है लेकिन एक बात तुम्हे क्या चाहिए ??? मेने तुमसे कुछ पूछा था तुमने उसका जवाब नहीं दिया
मतलब??? गिरिश ने अचरज भरी नजर से कहाँ
मेरा मतलब है, लड़का या लड़की
लड़की बिल्कुल तुम्हारी तरह ....
लड़की को तो गर्भ में ही मार देते हो... तुम यह
बोलकर शारदा जोर से हंसने लगी हंसी इतनी भयानक थी कि गिरीश के रोंगटे खड़े हो गए हंसते - हंसते अचानक शारदा रोने लगी...
गिरीश भागते हुए अपनी माँ के कमरे में चले जाता है माँ को सारी बात बताता है |
माँ ओर गिरिश दोनों ही सुबह होने का इंतजार करते हैं |
सुबह - सुबह ही गिरिश के घर के बाहर बेगा की आवाज सुनाई देती है | जो गिरिश को लगातार आवाज दिए जा रहे थे |
गिरिश हाथ जोड़ कर बेगा को घर में आने की विनती करते हैं |
बेगा घर में घुसते से ही नकारात्मक ऊर्जा का अनुभव करते हैं |
ओर शीघ्र अति शीघ्र घर खाली करने की सलाह देते हैं |
घर खाली करने के बाद गिरिश बेगा के पास जाता है | ओर कारण पूछता है बेगा उसे कारण बताता है।
उस घर में एक अतृप्त आत्मा रहती हैं | ओर वह आत्मा बहुत शक्तिशाली हैं |
अगर आज तुम्हारी बेटी मेरे पास ना आई होती तो यह तुमहारे परिवार की जिंदगी का आखिरी दिन होता |
मेरी बेटी?? लेकिन मेरी तो कोई बेटी नहीं है |
हाँ तुम्हारी बेटी जिसका तुमने गर्भपात लड़के की चाह में कराया था |
आज उसी के कारण तुम्हारी जिंदगी बच पाइ है |
वहां तुमसे आखिरी बार मिलना चाहती हैं क्योंकि उसकी मुक्ति का समय हो गया है |
मेरी गुड़िया कहते हुए गिरीश की आंखों में आंसू आ जाते है |
तभी एक धुंधली सी आकृति गिरीश में से होते हुए आसमान के मैं विलीन हो जाती हैं।
गिरीश भी नम आंखों से अपनी बिटिया को बिदाई देता है |
काजल हर्ष

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