दुख किसी को खो देने का
दुख किसी के साथ ना होने का
दुखी अपने दुख में
या दुखी किसी और के सुख में
खत्म नहीं होता दुख कभी जीवन से
शायद तभी अहमियत पता चलती है सुख की
दुख भी हिस्सा है जीवन का
या किसी का पूरा जीवन है दुख भरा
परिभाषित कैसे कर सकोगे दुख को
मायने सबके लिए अलग है दुख के
विलासिता भरे जीवन में
सुकून की नींद का दुख
या खाली पेट लेटने पर
नींद ना आने का दुख
हो चाहे जो भी दुख किसी का
लगता है सबको अपना ही दुख बड़ा
सोचते हैं हम हैं सबसे ज्यादा दुखी दुनिया में
शायद देख लेते आसपास तो पता चलता
कद्र नहीं करते हम जिस चीज की
इसी के लिए वह ना मिल पाना भी है दुख
देते सीख सभी खुश रहने की
पर अंतर्मन में कहीं ना कहीं छुपा है दुख
सिमरन

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