झुकी झुकी पलकों में कमान रखते हैं ,
हाथों में नहीं बातों में शान (धार) रखते हैं ।
यह आदत बहुत अलग है उनकी,
 कम लोगों को दिल का मेहमान रखते हैं ।
गम कितने भी आ जाएं उनकी जिंदगी में,
 वह होठों पर धीमी धीमी मुस्कान रखते हैं।
 इसलिए भा गए वो जमाने को ,
हजारों नहीं दिल में एक ही का  अरमान रखते हैं।
 कभी दिल को गुमराह नहीं होने देते,
 दिमाग और दिल पर पूरा इत्मीनान रखते हैं ।
जिनके लिए वह अपना बना लेते हैं ,
उनकी खुशियों के लिए कदमों में जान रखते हैं ।
बड़ी नाजुक मिजाज हैं उनके अंजुम,
किसी किसी पर खुद को मेहरबान रखते हैं।
 जानते हैं हाले दिल सनम का 
बस दिखाबे को खुदको अनजान रखते हैं।
 नहीं है कत्ल के लिए उन्हें ख़ंजर की जरूरत,
सुना है दो  नयनों की तलवार एक म्यान रखते हैं ।
जो कर लें वादा दिल से जां तक निभा जाते हैं ,
अपनी बातों से नही हटते  गजब का इमान रखते हैं।
  बहुत वेपरवाह बहुत अनजान हैं उनसे,
फिर क्यों उनके लिए खुद को लम्हें लम्हें परेशान रखते हैं।
रूठे तो मजाल हैं होंठ जरा भी हिलें,
आँखों की कलम से अपना बयान रखते हैं।

अंजू दीक्षित,
बदायूँ,
उत्तर प्रदेश।