बचपन तो छोड़ गया
पर बचपना न छोड़ना
दिल के किसी कोने में
चार यार जोड़ना
जवानी की मदमस्त खुमारी में
जब दिल टूटेंगे , दिल रोयेगा
मन उदास हो जायेगा
कुछ भी नहीं भायेगा
तब याद आयेंगे ,
बचपन के यार , उनका प्यार
जिंदगी की दौड़ में
जब भागने लगोगे तुम
प्रेम और परिवार को
छोड़ने लगोगे तुम
भागते - दौड़ते जब कभी तुम गिरोगे
जब कभी तुम थकोगे
तब फिर एक बार,
अपनी संतानों के साथ
बालपन को जीतना
उस उमंग में तैरना
जान नयी पा जाओगे
बचपने को जी जाओगे
फिर एक नई दौड़ को
तुम तैयार हो जाओगे
एक पड़ाव फिर आएगा
काम सारा हो जाएगा
लक्ष्य सारे पा जाओगे
पर खुद वीरान हो जाओगे
छा जाएगी घनघोर उदासी
तब फिर एक बार
पकड़ बचपने का साथ
नए सफर को जीतना
दो बचपन एक साथ
पकड़ एक - दूसरे का हाथ
ये हाथ फिर न छोड़ना
बचपना न छोड़ना
बचपना न छोड़ना।।
आशा झा" सखी

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