पहला इँसान पिता मिलता।
हर कदमताल से ताल मिला"
जीवन भर भाग दौड करता।।
नन्हे शिशु की ऊँगली को पकड"
कन्धे पर बिठाकर वो चलता।
इस दुनिया मे सबसे पहले"
पहचान पिता से ही मिलता।।
बच्चो की परवरिश मे अपना"
वह तन मन न्यौछवर करता।
माँ जननी के बाद मे ही"
पिता का स्थान सबसे ऊपर होता।।
धन्य है वो मात पिता जिससे"
मनुष्य का अवतरण होता।
पूज्यनीय है वो मात पिता"
जिससे ,मानव सृजन होता।।
रीमा महेन्द्र ठाकुर🙏✍️🏻
(लेखिका)

0 टिप्पणियाँ