वो पौधें की भाँति है
जिसे खुदा ने बहुत से गुणों 
से सींचा है
उसकी जड़ें उसके 
मज़बूत संस्कार है
उसकी हरी-भरी पत्तियाँ 
उसका खुशहाल जीवन है
अनजान लोगों 
के लिए
वो तने की भाँति कठोर जरुर है
लेकिन उसकी वाणी और व्यवहार 
उस कली की तरह ही कोमल है

उसकी सादगी और  सरल स्वभाव
उस सफ़ेद पुष्प की तरह है
जो शांति का प्रतीक है
व उसका तेज़ सूरजमुखी जैसा है

वो वट वृक्ष जैसी
जो अपनी छत्र-छाया में
न जाने कितनी पीढ़ियों का
उद्दार करती है
उसके समर्पण का
कोई मोल नहीं

वो तो सदियों से बस एक
ही चीज माँगती आयी है
सम्मान व समान अधिकार 
और अपने सपनों की आज़ादी
उस पिंजरे से छूटकारा
जिसने उसे मानसिक रूप से क़ैद 
कर रखा है।।

-आरती वत्स