स्मार्टफोन की महिमा न्यारी।इसके आदी सब नर-नारी।।
ये जिसके भी हाथ में जाये।माया से इसकी बच न पाये।।
वाट्सएप,फेसबुक समय को खाते।
फिर भी दिन भर लोग चलाते।।
इंस्टाग्राम हो या हो ट्वीटर।
इनके अनुगामी हैं घर घर।।
बच्चें गेम खेलें ऑनलाइन।
करते व्यर्थ कीमती टाइम।।
आवश्यक साधन बन आया।
इंटरनेट का नशा सा छाया।।
पिता समान यूट्यूब,माँ गूगल।
चुटकी में करते समस्या हर हल।।
मोबाइल का है वृहद पुराण।आपको हमको और भी काम।।
कथा का यहीं करते विराम। चलते हैं सबको जय सियाराम।।
🙏 🙏 🙏 🙏 🙏
– प्रीति ताम्रकार
जबलपुर

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