बदल रहा मौसम है,
बदलते लोगों को तरह,
ख़ुशी आंखो मे बस्ती थी,
लोग आज आंख होके ,
अंधे फिरते है

ख़ुशी कहीं गायब हो गई है
आपने का प्यार सपना 
बनते जा रहा है,
दादा दादी का प्यार अब
सपना हो गया है

पहले किताब और अपने बड़ों से सीखते थे,
दुलारा और सम्मान की भाषा
लेकिन आज सब पुराना हो गया है,
रीत सदा चली आई अब सिर्फ सुनने के शब्द रह गए है!
  

               लक्ष्मणी खरे 🖌️