मैं देश के हृदय कहे जाने वाले राज्य मध्य प्रदेश के इंदौर शहर से रहने वाली हूँ।मुझे मेरा शहर इंदौर शुरू से ही बहुत पसंद था,इसीलिए मैंने इंदौर के होलकर साइंस कॉलेज से अपना ग्रेजुएशन पूरा किया।मास्टर्स करने के लिए मैंने कई सारी अच्छी यूनिवर्सिटीज के exams दिए।मेरी उम्मीद के हिसाब से मुझे दो अच्छी यूनिवर्सिटी MKU  और पोंडीचीरी यूनिवर्सिटी से कॉल आ गया,और मेरी मेहनत रंग लाई,मेरा इंटरव्यू के बाद सेकेक्शन हो गया।लेकिन कहते है ना कि होता वही है जो उस उपर वाले ने हमारे लिए लिखा होता है।इस उम्मीद से कि मेरा भारत की दो बेहतरीन यूनिवर्सिटी में चयन हो चुका है,मैंने मेरे घर के सबसे नजदीक यूनिवर्सिटी DAVV में एड्मिशन के लिए फॉर्म नहीं भरा।

हमारे भारत देश में रिश्तेदार किसी का अच्छा होते देख ही नहीं सकते,वंही मेरे साथ भी हुआ,मेरे जोइनिंग के 20 दिन पहले मेरे पापा ने फरमान सुना दिया,कि मैं उन दोनों में से कोई भी यूनिवर्सिटी नहीं ले सकती।मेरे कारण पूछने पर बताया गया कि चूंकि मैं एक अस्थमा की पेशेंट हूँ,तो उनको मेरे किसी दूर के फूफा ने बताया कि वंहा किसी भी अस्थमा वाले पेशेंट के लिए सर्वाइव करना मुश्किल होता हैं।मैंने बोला भी की सावधानी रखने से कुछ भी नही होता,ये भी तर्क काम नहीं किया कि वंहा भी तो अस्थमा के पेशेंट होते है ना वो कैसे रहते होंगे।मेरे बहस करने पर पापा ने अपना आखिरी राम बाण इमोशनल अत्याचार चलाया,और मैं धराशायी हो गई।मेरे सारे सपने मेरे सामने चूर हो गए।

क्योंकि मैंने DAVV में भी फॉर्म नहीं डाला था,इसलिए मेरा पूरा साल मुझे एक रिश्तेदारी के बेवकूफी के कारण खराब होते दिख रहा था।ऐसे में मेरी एक फ्रेंड मेरे घर आई,और बोली कि अभी एमिटी यूनिवर्सिटी जयपुर  में फॉर्म फील हो रहे है,तू चाहे तो,मेरे साथ फॉर्म भर सकती है।मुझे अपनी लाचारी पर बहुत रोना आ रहा था,कि कँहा तो मेरा भारत की टॉप टेन यूनिवर्सिटी में से एक में चयन हो गया था,और कँहा अब मुझे एक प्राइवेट यूनिवर्सिटी में एडमिशन लेना पड़ रहा है,जिसकी फीस भी कई गुना ज्यादा थी।पर फिर मैंने एक बार हिम्मत कर पापा से बात की।वो मुझे अवसाद में जाते हुए देख रहे थे,इसलिए वो बिना कोई बहस के मान गए।

कुछ फॉर्मेलिटीज के बाद मेरा जयपुर की एमिटी यूनिवर्सिटी में एडमिशन हो गया,और मैं अपनी दोस्त के साथ जयपुर आ गई।भले ही मैं जयपुर आने से ज्यादा खुश नहीं थी,लेकिन वंहा मुझे बहुत अच्छे दोस्त मिले, जिन्होंने मुझे दोस्ती का असली मतलब सिखाया।ऐसे में ही मेरे नज़दीक एक ऐसी लड़की आई,जिसके एक अच्छी लड़की से अपने हाथों अपनी ज़िंदगी बर्बाद करने तक का सफर मैंने खुद अपनी आंखों से देखा था।

उस लड़की का नाम कंवर दीप कौर था,नाम से ही समझ आता है कि वो सिख फैमिली से थी।उसने मेरी ही क्लास में एडमिशन लिया था।मुझे आज भी याद है जब मैंने उसे पहले देखा था तो उसने पर्पल कलर का कुर्ता और नीचे जीन्स पहन  रखी थी,गौरा रंग,तीखी नाक,गालों पर एक छोटा सा तील, घुंघराले बाल,उन पर भी जुड़ा।इन सब को और सुंदर बनाता उसका नेचर,बोलती थी तो ऐसा लगता था कि अच्छाई और इंसानियत की मूरत हो।एक गुण और था उसमें जो उसे औरो से अलग रखता था,वो एक होनहार छात्रा थी।कुल मिलाकर एक ऐसा पैकेज जिसे एक सही डायरेक्शन में चलाया जाए,तो सफलता के नए मुकाम छू सकता हो।

वो मुझे पहले ही नज़र में भा गई थी,इसलिए हमारी दोस्ती भी जल्दी हो गई थी।मैं और मेरी दोस्त रश्मि ने होस्टल में एक ही रूम लिया था।कुछ दिनों बाद ही रश्मि का बॉय फ्रेंड बन गया,और उसकी और मेरी निकटता उसके बॉयफ्रेड को पसंद नही आती थी,तो उसने रूम चेंज कर लिया था।मुझे एक नई रूममेट मिली,वो और कोई नहीं कँवर थी, हम सारे दोस्त उसे प्यार से कन्ना बुलाने लगे थे।

कन्ना एक नीचे तबके के मध्यम वर्ग परिवार से थी,तो उसने पैसो की किल्लत शुरू से देखी थी।घर में सबसे बड़ी होने के कारण जिम्मेदारी उस पर शुरू से ही ज्यादा थी,वो शुरू से ट्यूशन करके अपने पापा को सपोर्ट करती थी।वो पढ़ने में अच्छी थी,इसलिए उसके पापा ने लोन लेकर उसे एमिटी यूनिवर्सिटी में भेजा था।कँवर  अच्छे से पढ़ रही थी,एक सेमेस्टर निकल चुका था।कंही न कंही एमिटी की चकाचौंध कँवर को अपनी और खींच रही थी।

उसका नेचर अच्छा होने के कारण,सभी का व्यवहार उसकी तरफ अच्छा था।हमारी क्लास में स्वतंत्र नाम के लड़के से कँवर की अच्छी बॉन्डिंग हो चली थी।कन्ना के मन में उसके लिए प्यार का बीज पनप चुका था,पर स्वतंत्र के लिए वो केवल एक अच्छी दोस्त थी।कँवर ने एक दिन स्वतंत्र से अपनी मन की बात कह ही दी,पर स्वतंत्र का रिजेक्शन वो सहन नहीं कर पा रही थी।उसने हर तरह से स्वतंत्र को पाने की कोशिश की,वो कहते है ना"by hook or by crook."पर वो नाकाम रही।हमारे सारे दोस्त कन्ना की हरकतों से चीढ़ने लगे थे, लेकिन मैं जो बिना किसी प्रतिक्रिया इतने दिनों से ये सब देख रही थी,आज उससे बात करने का मन बना चुकी थी।

मैंने कॉलेज से हाॅस्टल पहुंच कर,उंसके पास गई और उसका हाथ पकड़ कर बोली,"कन्ना स्वतंत्र को भूल जा,वो तुझे प्यार नहीं करता,तेरे लिए उससे भी अच्छा कोई लिखा है।"

मैं उससे बहुत ज्यादा attach हो चुकी थी,इसीलिए पहली बार किसी के मैटर में बोल रही थी,और मुझे विश्वास था कि कंवर मेरी बात सुनेगी और समझेगी भी,पर उंसके जवाब ने मुझे अंदर से हिला दिया।वो बोली,"तुम लोगो को क्या लगता है,मैं कोई छोटी बच्ची हूँ क्या??जो कोई भी आया और अपना सुना कर चलता बना।यार मैं भी चाहती हूँ,मेरा भी कोई बॉयफ्रेंड हो,वो मुझे गिफ्ट्स दे,मुझ पर खर्चा करे।"

मैं कंवर की बात सुन कर चौंक गई,कुछ देर रुखकर मैं बोली,"यार प्यार इन सब से बहुत अलग होता है।"

"देख,तू तो बोले मत,नवीन को पागलो के जैसे अपने पीछे घुमा रही है,पूरा एमिटी जानता है कि नवीन तुझे पसंद करता है,पर तूने दोस्ती का राग अलापा हुआ है।पर उंसके साथ घूमती है,उंसके गिफ्ट्स लेती है।"वो ये सब मुझे बोलने लगी।

वो और कुछ बोलती,उससे पहले मैं बिना कुछ बोले वंहा से चली गई।कोई मेरी और नवीन की दोस्ती पर सवाल उठाए, मुझसे सहन नहीं हुआ।दूसरे दिन मैंने वार्डन को बोलकर रूम बदल लिया।मेरे सारे फ्रेंड्स उससे कटने लगे थे।

कुछ दिनों बाद हमे पता लगा कि उसने ऑनलाइन कोई बॉयफ्रेंड बना लिया था,वो उससे मिलने भी आता था।एक दिन मालुम पड़ा कि वो उसके उस ऑनलाइन बॉयफ्रेंड के साथ मनाली घूमने गई है।मुझे उसकी हरकते बहुत आहत करती थी,क्योंकि मैंने उसे सच्चे दिल से दोस्त माना था।

एक दिन मैं अपने रूम में बैठे अपने लैपटॉप पर कुछ काम रही थी।तभी किसी ने मेरा रूम नॉक किया, मैंने दरवाज़ा खोला तो देखा कि सामने कंवर खड़ी थी।मैं उसके बोलने का इंतज़ार करने लगी कि वो कुछ बताए कि वो यँहा क्यों आई है क्योंकि उस दिन के बाद हमारे बीच में कोई बात नहीं हुई थी।

वो कुछ बोली नहीं पर मुझे कस कर गले लगा लिया,और फुट फुट कर रोने लगी।मेरे अंदर एक कमजोरी है,मैं किसी को दोस्त मानती नहीं,ओर जब मान लिया तो फिर उनके लिए जान भी हाज़िर है।मेरी इस कमजोरी से कन्ना अच्छे से वाकिफ थी,उसी का फायदा उठाने के लिए वो आज मेरे सामने खड़ी थी।

मुझसे उसका रोना देखा नहीं गया तो मैंने उसे अंदर कमरे में बुलाया,उसको पलंग पर बैठाया, पानी पिलाया,और पूछा,"क्या हुआ,क्यों रो रही हो।"

वो रोते रोते बोली,"मैं प्रेग्नेंट हूँ,और वो आर्यन फ़ोन नहीं उठा रहा।"मैं उसकी बात सुनकर एक दम shocked हो गई,मुझे कुछ समझ नहीं आया,तो मैं बोली,"मुझसे क्या चाहती हो।"

"मुझे टेबलेट्स चाहिए,ताकि मैं इस झंझट से छुटकारा पा सकू।"वो रोते रोते बोली।

"कल तक मंगवा दूँगी।"मैंने उसे बोला।
वो मुझे थैंक यू बोलकर जाने लगी तो मैंने बोला,"कँवर सुन।"वो पलटी तो मैंने बोला,"this is the last time I m helping u in this rubbish matter."मेरी आवाज में गुस्सा था,वो मेरी तरफ देखकर बिना कुछ बोले चली गई।

मैंने नवीन से कहकर टेबलेट मंगवा दी।कुछ दिन वो मुझसे अच्छे से बात करती रही,फिर धीरे धीरे बात करनी बंद करती गई।मैंने उसे कुछ भी बोलना छोड़ दिया था क्योंकि उस पर किसी भी बात का कोई असर नहीं होता था।उसे फ्रीडम चाहिए थी जो कि उसे अपने घर पर कभी नहीं मिली,लेकिन फ्रीडम कब उद्दंता बन गई,उसे पता ही नहीं लगा।

एक दिन मुझे पता लगा कि उसके रूम से ड्रग्स,सिगरेट और शराब की बोतल मिली,इसलिए उसे वार्डन ने होस्टल से निकाल दिया।अब वो प्रॉपर जयपुर में जाकर रहने लगी थी।कुछ दिन बात पता लगा,कि उसने कोई अमीर बॉयफ्रेंड बना लिया,जो उसके सारे खर्चे उठाता था।ये सब सुनकर मैं मन ही मन सोचने लगी,"कंवर तुम कितनी बदल गई,अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए तुमने अपने ईमान तक को बेच डाला।"मुझे उसकी ऐसी हालत पर बहुत दुख होता था,पर उसे किसी भी बात का कोई फर्क नहीं पड़ता था।

हमारे लास्ट सेमेस्टर चल रहे थे, तब हम लोगो को पता लगा कि कन्ना ने सुसाइड कर लिया है।ये खबर सुनकर,मेरे पैरों तले जमीन खिसक गई।आगे की पड़ताल करने पर पता लगा कि उसे अमीर बॉयफ्रेंड ने एक दिन छोड़ दिया,फिर उसने अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए प्रॉस्टिट्यूट का काम करना चालू कर दिया था।एक दिन ये सब उंसके पापा को पता लग गया, वो उनसे नज़रे नहीं मिला पाई, इसलिए उसने अपने आप को खत्म कर दिया।

आज भी जब उसे याद करती हूँ,तो आंख भर आती है। "वो एक अच्छी लड़की थी,मगर दुनिया की चकाचौंध और एक स्टैंडर्ड लाइफ जीने के सपने ने सब कुछ खत्म कर दिया।अगर वो चाहती तो सफलता के नए आयाम छू सकती थी।"

आज उसे याद कर एक बार फिर आंखे नम है,वो एक अच्छी लड़की थी,और मेरी बहुत अच्छी दोस्त भी थी।ईश्वर उसकी आत्मा को शांति दे।

प्रीति