क्या कहें उनकी नजरों का असर,
दिल मे खिला गयीं चाहतों का सजर।
एक अजब सा जादू है उन नयनों में,
मिलते ही भूल जाते हैं सब सासें जाती हैं ठहर।
गर लगा ले आँख में काजल तो बन्दा फना,
फिर जरूरत नही हाथ मे लेने की ख़ंजर।
झुकी पलकें भी तो ढाह देती हैं सितम,
उठती पलकें न पूछों कैसे वरपाती हैं कहर।
प्यार हो आँखों में तो दिल की प्यास बुझे,
गुस्सा हो तो लगती हैं और जहर।
तेरे हुस्न को क्या कहें शायद जादू है,
लगता है जैसे ठहर सी गयी है उमर।
मेरे हो मेरे ही रहना बस इस जन्म,
मै भी रहूंगी बस तेरी हमसफ़र।
दूरियां राहों की हैं मंजूर मुझे,
पर कभी दिल से दूर होने का न करना ज़िकर।
अंजू दीक्षित
बदायूँ
उत्तर प्रदेश

0 टिप्पणियाँ