थी एक  तस्वीर भुलानी ,
मगर  यादें  जिंदगानी है ।
जिंदगी से हाथ मिलाया, 
तो लगा  सांस बांकी है ।

रास्ता रोक रही पुरानी यादें ,
कुछ  दीवार   गिरानी  है।
बांकी है मिलना ज़िंदगी से,
भले  ही  नामुमकिन  है।

गम के पत्थर को टूटना है,
मेरे अश्कों  में रवानी  है ।
आंखों  में  नींद गुम  है, 
फिर भी सपने अभी संजोने है ।

वक्त है खुलकर मुस्कुराने की,
दर्द भरी यादें कुछ  उड़ानी है ।
मुश्किल है रास्ता बहुत जानते हैं,
पर मन मैं हौसला अभी बाकी है।





            अम्बिका झा