⚘⚘⚘⚘   ॐ ⚘⚘⚘
बेटा जब होता हैं, खुशियां मनाई जाती है,
और तो और दावत की रसम भी निभाई जाती है,     ससुराल की ओर से,भेली शगुन के तौर पर मायके में-भिजवाई जाती है--
और तो और, कुआ पूजन की रस्म भी--
निभाई जाती है,बेटी जब होती है बस एक ही बात-- सुनाई जाती है--
अरे क्या हुआ है, बेटी हुई है कोई बात नहीं--
दर्द होता है भेदभाव पर, जब बेटे की खुशियां मनाई जाती है--
बेटी होने की खुशी क्यों नहीं मनाई जाती है-- 
बेटा जब दूजा होता है-- 
तब खुशियां दुगनी 
मनाई जातीहैं,
बेटी जब दूजी होती है, तब दुगनी बातें सुनाई जाती हैं, दूसरी बेटी हो गई कोई बात नहीं, सब अपने भाग्य की लाती हैं--
बस यही बातें सुनाई जाती हैं,
कोई बात नहीं, कोई बात नहीं-- 
  में कुछ अनकही बात होती है--
सबके लिए तो, बस यह एक दिलासे की बात होती है, लेकिन, उस माँ के दिल से पूछो, इस दिलासे से उसके-- दिल में कितनी चोट होती है,

प्रार्थना है उस देवी से 
उस परमेश्वरी से 
कुछ ऐसा चमत्कार कर दो 
लोग तरसे बेटी को, बेटी जाति पर  उपकार कर दो--
ना करें कोई हत्या बेटी की, कुछ ऐसा उपकार कर दो।

                                  




                            संगीता वर्मा