आज आफिस में सारे कुलीग के बीच किसी टॉपिक पर बहस चल रही थी।रीति अपने काम में मग्न थी,उसे  इन सब से कोई मतलब नही था,फिर इण्टरकॉम पर उसके लिए फ़ोन आया।उसने उठाया,तो उधर से आवाज़ आई,उसके बॉस ने उसे केबिन में बुलाया था।उसने फटाफट से फ़ाइल को लेकर,वो बॉस के कैबिन में चली गई।काम होने के बाद वो बहार आई,कॉफी लेने के लिए आफिस के उस हिस्से में चली गई,जँहा उसके सारे कुलीग किसी बात पर बहस कर रहे थे।उसने उन सब की तरफ एक फीकी सी स्माइल दी,और टेरेस की तरफ चल दी।

वो जैसे ही जाने के लिए बड़ी,उसके एक कुलीग ने आवाज़ दी,"रीति इधर आओ,अब तुम ही इस बहस का conclusion निकाल सकती हो।"वो रुकना तो नहीं चाहती थी,पर कुलीग ने आवाज़ दी तो उसे रुकना पड़ा।

जैसे ही सभी के पास पहुंची,उनमे से एक बोला,"यार रीति अब तुम ही बताओ,प्यार एक जिस्मानी रिश्ता है या,फिर दो रूह का मिलन।"

ये बात सुन कर वो एक दम बर्फ सी जम गई,वो अपने अतीत के उस हिस्से में चली गई,जिसे भूलने की वो पिछले 5 साल से कोशिश कर रही थी,पर सबके एक सवाल से उसके दिमाग में अतीत के वो पन्ने फिर से घूमने लगे।

"अरे रीति,बोल ना,प्यार दो रूह का मिलन है ना?ये लोग कह रहे कि प्यार केवल एक जिस्मानी रिश्ता है।"उनमे से एक लड़की प्रीति ने बोला।

प्रीति के सवाल से रीति होश में आई और बोली,"गाइस यु आल कैरी ऑन, आई हैव सम इम्पोर्टेन्ट वर्क too do.."इतना बोलकर वो टेरस की ओर मुड़ गई।

"अरे,कँहा चली,हमारी बात का जवाब तो देती..."प्रीति की बात भी पूरी नहीं हुई थी,उससे पहले प्रीति उनके सामने से नदारद हो गई।

"यार इसे क्या हो जाता है,ये हमसे इतना रूखा बर्ताव क्यों करती है।"रीति के ऐसे बिना कुछ बोले जाने से रवि बोला।

"यार,हमे क्या,जब वो खुद ही हमारे साथ नहीं रहना चाहती,तो हम क्या कर सकते है।"प्रीति फिर से बोली।

उधर रीति छत पर पहुंच कर जोर जोर से सांस लेने लगी।उसने अपने कॉलर की बटन खोले,और पॉकेट से सिगरेट निकाल कर कश लेने लगी।वैसे तो रीति सिगरेट ना के बराबर पीती थी,लेकिन जब कभी अतीत की वो बाते उससे टकराती थी,उसके लिए अपने आप को नार्मल करना मुश्किल हो जाता था,और वो अपना स्ट्रेस कम करने के लिए पीती थी।सिगरेट के कश लेते हुए उसकी आंख से आँसू निकल कर,उसके चेहरे को भिगो रहे थे।

सिगरेट के कश लेते हुए वो सोचने लगी कि जब उसे प्यार हुआ था,उसके लिए भी तो प्यार दो रूह का मिलन ही था,लेकिन आखरी में प्यार एक जिस्मानी रिश्ता ही साबित हुआ।

बात उन दिनों की है,जब रीति इंदौर के होलकर साइन्स कॉलेज से अपना ग्रेजुएशन कर रही थी।उसका सेकंड सेमेस्टर चल रहा था,और वो उसके सारे दोस्तो के साथ यूनिवर्सिटी की लाइब्रेरी जाने वाली थी।उन दिनों इंदौर में एक जगह से दूसरी जगह जाने के लिए वैन होती थी।उन सारे दोस्तो ने वैन से यूनिवर्सिटी जाने का डिसाइड किया था।

वो लोग निकलने ही वाले थे कि इतने में ही,रीति का दोस्त आकर बोला,"हमारे सीनियर्स और एक सुपर सीनियर्स भी यूनिवर्सिटी जा रहे है,उनके पास एक गाड़ी भी है,वो हमें भी साथ चलने का बोल रहे है,क्या हम भी चले उनके साथ??"

कोई भी इंदौर के ट्रैफिक में परेशान नहीं होना चाहता था, इसलिए सबने से आसानी अपनी सहमति दे दी।रीति और उसके फ्रेंड्स गाड़ी में आकर बैठ गए।गाड़ी में रीति और रीति के चार दोस्त,कुछ सीनियर्स और एक सुपर सीनियर हर्ष था।हर्ष ने रीति और उसके फ्रेंड्स के नंबर ले लिए थे,चूंकि हर्ष सुपर सीनियर था,इसलिए किसी की भी मना करने की हिम्मत नहीं हुई।

हर्ष रोज रीति को फोरवर्डेड मैसेज भेजा करता था,लेकिन रीति हमेशा इस बात को casually लेती थी।

एक दिन जब रीति कॉलेज से हॉस्टल के लिए निकल रही थी,तब उसके दोस्त रजनीश ने पीछे से आवाज़ दी,"रुख, मुझे तुझसे कुछ बात करनी है।"

"जल्दी बोल,पापा आने वाले है,मुझे जल्दी से होस्टल पहुचना है।"रीति ने पीछे मुड़कर बोला।

"रीति हर्ष सर ने नखराली ढाणी में पार्टी रखी है,हम सब को इनवाइट किया है।तू आ रही है ना?"रजनीश ने बोला।

"नहीं यार,तुम लोग हो आना,मैं नहीं आ पाऊँगी,पापा नहीं मानेंगे।"रीति ने जवाब दिया।

"यार ऐसा मत कर,सर ने specially तुझे इनवाइट किया,अंकल से बात करके देख,शायद मान जाए।"रजनीश ने बोला।

रीति को speciaally उसको इनवाइट करने वाली बात खटकी,पर उसने उस बात इग्नोर कर दिया और रजनीश से बोली,"देख कोशिश करूँगी,पक्का कुछ नहीं बोल सकती।"इतना बोलकर वो वंहा से चली गई।

उसके जाते ही,हर्ष आया,और रजनीश को बोला,"थैंक्स ब्रो।"

"सर आपका काम हो जाए तो मुझे मत भूल जाना।"रजनीश हँसते हुए बोला और वंहा से चला गया।

रीति ने डरते डरते अपने पापा से पूछा,और वो मान गए।रीति ने फ़ोन करके रजनीश को बोला,"मैं आ रही हूँ पार्टी में,लेकिन 6 बजे के पहले मुझे वापिस आना होगा।"

रजनीश यही बात हर्ष को बता दी।हर्ष को पहली नज़र में ही रीति पसंद आ गई थी,वो रीति को अपनी गर्ल फ्रेंड बनाना चाहता था।

दसरे दिन सुबह सारे दोस्त भवर कुआ पर मिले, बस रीति अभी तक नहीं आई थी।हर्ष ने घड़ी देखते हुए रजनीश को बोला,"रीति को फ़ोन लगाकर पूछो,वो कँहा रह गई।"

रजनीश ने रीति को फोन लगाया तो उसने बताय," वो आ रही थी तो रास्ते में एक आंटी का एक्सीडेंट हो गया है,इसलिए वो उन्हें हॉस्पिटल लेकर आई है,उसे टाइम लगेगा।वो सीधे नखराली ढाणी आ जाएगी।"

जब रजनीश ने ये बात हर्ष को बताई तो हर्ष ने कुछ सोचकर रजनीश से बोला,"तुम उससे हॉस्पिटल का एड्र्स मैसेज करने का बोलो,और बोलो कि मैं उसे लेने आ रहा हूँ।तुम सब लोग निकलो,मैं रीति को लेकर पहुंचता हूँ।"

हर्ष हॉस्पिटल पहुच गया,उसने वंहा जाकर आंटी की मदद की,और उन्हें सही सलामत घर भी पहुँचवा दिया।हर्ष का ये रूप देखकर रीति भी उससे इम्प्रेस हुए बिना नहीं रह पाई।वो दोनो वंहा से नखराली पहुचे, वंहा भी हर्ष ने रीति का पूरा पूरा ध्यान रखा अब कंही न कंही रीति भी हर्ष को पसंद करने लगी थी।

उन दोनों के बीच मैसेज,कॉल और मिलने का सिलसिला बड़ता गया।रीति फोर्थ सेमेस्टर में पहुँच गई थी,और हर्ष ने प्रेस्टीज कॉलेज में MBA करने के लिए एडमिशन लिया था।

फिर एक दिन हर्ष ने उसे खजराना मंदिर में बुलाया,और उसके गणपति के मूर्ति के सामने ले जाकर उसका हाथ पकडकर बोला,"रीती मैं इन गणपति को साक्षी मान कर ये बताना चाहता हूँ कि मैं तुम्हें पागलो की तरह चाहता हूँ,और तुम्हारे साथ अपना पूरा जीवन बिताना चाहता हूँ।क्या तुम मेरे साथ अपना पूरा जीवन बिताओगी।"इतना बोलकर हर्ष जमीन पर बैठ गया,और उसके जवाब के लिए उसकी तरफ देखने लगा।

रीति हर्ष की ऐसी बाते सुनकर,कुछ बोल ही नहीं पाई,उसकी आंख से आंसू निकल पड़े।उसकी आंख में आँसू देखकर,हर्ष बोला,"अगर तुम्हारे मन में ऐसा कुछ नहीं है तो भी बोल दो,मुझे कोई बुरा नहीं लगेगा।"

रीति धीरे से बोली,"ऐसा कुछ नहीं है सर।"

"तो फिर क्या है बोलो रीति,do u love me?"हर्ष ने उसके कंधो को पकड़ते हुए बोला।

"yes,I do sir.."रीति ने जवाब दिया,और उसकी आंख से आँसू निकलने लगे।

हर्ष ने रीति को गले लगा लिया।वो बहुत देर तक ऐसे ही खड़े रहे।उन दोनों का प्यार परवान चड़ा,और हर्ष और रीति को एक दूसरे के साथ के अलावा कुछ नहीं सूझता था।इसी दौरान हर्ष और रीति ने अपनी सारी सीमाए पार कर दी थी।रीति को हर्ष पर खुद से ज्यादा विश्वास था,इसलिए उसने कभी भी हर्ष को अपने करीब आने से नहीं रोका,उसने मन ही मन में हर्ष को अपना पति मान लिया था।

ऐसे ही टाइम निकलता गया,हर्ष का MBA पूरा हो चुका था,और रीति ने भी ग्रेजुएशन करके MBA के लिए इंदौर के अच्छे कॉलेज में एडमिशन ले लिया था।हर्ष का पुणे की एक मल्टीनेशनल कंपनी में सिलेक्शन हो गया था।हर्ष पुणे चला गया,रीति को इस बात का आश्वासन देकर कि दूरियो से हमारे रिश्ते पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।रीति ने हर्ष को उसके फैसले में साथ दिया,और उसे खुशी खुशी पुणे जाने दिया।

शुरू शुरू में तो हर्ष और रीति के बीच में,रेगुलर काल,मिलना,वीडियो चैट बरकरार रहा।कुछ महीनों बाद में हर्ष के काल आने बंद हो गए,रीति रात रात भर उसके कॉल्स का रास्ता देखती,पर ना कॉल,ना मैसेज, कुछ भी नही आता।

एक दिन रीति ने पुणे जाने का मन बना लिया,उसने हर्ष के दोस्त से हर्ष के फ्लैट का एड्र्स लेकर,एयरपोर्ट से सीधे उसके फ्लैट पर पहुच गई।उसने फ्लैट की बेल बजाई, जैसे ही गेट खुला,सामने एक लड़की को नाइटी में दरवाज़े पर देखकर रीति शॉक्ड हो गई।

उस लड़की ने बोला,"आप कौन?"

इतनी देर में पीछे से हर्ष आकर बोला,"क्या हुआ जान,कौन है?दरवाज़े पर रीति को देखकर वो shocked हो गया।

खुद को संभालते हुए बोला,"हे,रीति अंदर आओ।"फिर उस लड़की की तरफ देखकर बोला,"जान ये मेरी कॉलेज फ्रेंड रीति,और रीति ये मेरी  वाइफ सान्वी"।

जब हर्ष ने वाइफ वर्ड यूज़ किया तो रीति ने सान्वी को देखा तो सान्वी के हाथ मे चूड़ा,और माथे में मांग भरी हुई थी।इससे समझ आ रहा था कि  वो शादी शुदा है।

रीति वंहा से बिना कुछ बोले निकल गई।सड़क पर एक किनारे बैठे बैठे,पता नहीं कितने समय तक रोती रही।उसे हर्ष के एक फ्रेंड ने हर्ष के कहने पर इंदौर वाली ट्रेन में ले जाकर बैठा दिया।

आज पांच साल बाद भी रीति ये नही समझ पाई की हर्ष ने उसके साथ ऐसा क्यों किया।फिर एक सोच के साथ फीकी सी स्माइल देती हुई बोली
"उसके लिए प्यार केवल एक जिस्मानी रिश्ता था

प्रीति