लुका छुपी का खेल खिलाती है जिंदगी
वक्त बेवक्त हँसाती रुलाती है जिंदगी
पहले दोस्तों के संँग लुका छुपी का खेल खेलते
अब हालात और जज्बात के साथ खेल खिलाती है जिंदगी
लुका छुपी का खेल खिलाती है जिंदगी
कभी सच के पर्दे तो कभी झूठ के पर्दे का नकाब पहनाती है जिंदगी
कभी अपनों में छुपे बेगाने को तो कभी बेगानों में छुपे अपनों से मिलवाती है जिंदगी
लुका छुपी का खेल खिलाती है जिंदगी
लुका छुपी का खेल खिलाती है जिंदगी
कभी ऊंँचाई के शिखर पर चढ़ा कर तो कभी नीचे धरा पर गिराती है जिंदगी
कभी महलों का ख्वाब दिखाकर तो कभी मिट्टी पर सुलाती है जिंदगी
लुका छुपी का खेल खिलाती है जिंदगी
कभी सब कुछ दे देती है तो कभी सब कुछ छीन लेती है जिंदगी
कभी तनहाई तो कभी भीड़ के मेले देती है जिंदगी
ना जाने कितने रंँग दिखाती है यह जिंदगी
पग पग पर लुका छिपी का खेल खिलाती है जिंदगी
शिल्पा मोदी

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