जिसकी  किलकरिया  गुँजा  करती  थी  घर  आँगन मे 
आज  उसकी  तस्वीर   खामोश  लटकी  पड़ी  है  दीवारों  मे 
अपने माँ बाप की आँखो  का  तारा  जो  थी  कभी  
आज  वो  जा  पहुंची  है  सितारों मे 

वो  लड़की  ना  जाने  कहाँ  खो  गई  
ख़बर  ही  ना  थी  कोई  इस  ज़माने  में  

घर  से निकली  थी  धूमने  बाजारों  मे 
अजानक  से साँसे टूट गई  उसकी राहों मे 

ये क्या हो गया  ना जान पाया कोई भी 
सब हैरान थे अभी तो इतनी खिलखिला रही थी 

एक पल में ही बिछी पड़ी है ये तो ज़मीन  में 
माँ बाप दौड़ दौड़े आये हैरान  परेशान से 

ये क्या हो गया उनकी लाडो को 
क्यों छोड़ कर चली गई  इस  संसार  को 

कुछ पता नहीं चल पर रहा था 
बेसुध से वो भी गिरे जा रहे थे 

एक पल में ही दुनिया बदल गई 
खुशियों भी  देखो इस घर से रास्ता भूल गई 

अब तो राहें तकती  है कभी ना पुरे होने वाली इंतजार मे 
ना जाने वो कहाँ खो गई एक मीठी सी मुस्कान लिए आसमानो मे...... 




                    आलिया खान