गहरी नींद से जागकर स्वयं को धरती पर पाकर
उसकी आँखे फटी की फटी रह गई होगी न
अपनी ही आकृति देखकर विस्मित हुआ होगा न
धरती अंम्बर चारो ओर प्रकृति की हरियाली देखकर उसका सर चकराया होगा न
जब उसके कंठ सूख रहे होगे कल कल बहती
नदीया का ठंडा ठंडा पानी पीने के लिए पहली बार हाथ बढाया होगा न
भूख का अहसास होते ही वृक्षो से फल पत्ती लपककर
तोड़कर खाकर तृप्त हुआ होगा न
क्या उसके स्मरण शक्ति मे ईश्वर का ख्याल आया होगा
ईश्वर ने मुझे क्यों रचा है मन मे सवाल आया होगा
खुद को एकांँत पाकर जरूर घबराया होगा
जरूर ईश्वर ने उसे रचा होगा तब उसके मस्तिष्क मे
अपने नाम का स्मरण शक्ति का बीज बोया होगा
तभी आँखे मीचे ईश्वर से एकल मानव ने प्रार्थना की होगी
मै अकेला क्या करूँ सृष्टि पर और मानव बनाया होता
शायद उसकी विनती सुनकर ईश्वर ने अधिक संँख्या
मे मानव को रचकर संँसार बसाया होगा
शिल्पा मोदी✍️✍️

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