सपने   सजाए रखो दिल मेंं खुशी बनाए रखो।
मायूसी को भूलकर आशा की लौ जलाए रखना......

मन को भटकने न दो  ,कुछ यत्न ऐसा करो।
हृदय उद्दिग्न है ग़र आशा की लौ जलाए रखना....

छा जाए जब चहुँओर अधेरा, दिखे न कहीं सवेरा।
किरण एक दीप्त कर रोशनी की लौ जलाए रखना......। 

सोचते कुछ और पर, हो जाता कुछ और है।
व्यर्थ मेंं डरो नहीं बेफिक्र हो लौ जलाए रखना......

रात काली ,लम्बी , दिल मेंं हो हलचल मची।
प्रभु के पावन नाम की एक लौ जलाए  रखना....

जब दिन काटे न कटे अपने भी नज़रें फ़ेर ले।
निज कर्म करके हिम्मत की लौ जलाए रखना......

प्रेम पथ अति दूर हो प्रिय से मिलन कठिन हो।
विरहाग्नि मेंं न जलो  प्रेम की लौ जलाए रखना....।

नफरतों से नहीं मिला है कुछ भी किसी को आज तक।
अपने आसपास भी तुम  मोहब्बतों की लौ जलाए रखना......

मंजिल का  पता न हो राह कांटों से भरी हो।
हाथ मेंं ले आशा की लौ कदम बढ़ाए रखना.......

चलती  हो तेज आंधियाँ   डूबती हों किश्तियाँ।
भयानक मंजर मेंं भी आस की लौ जलाए रखना......।

उम्मीद टूटने ना पाए  आस छूटने  न पाए।
हर घड़ी,डगर हौसलों की लौ जलाए रखना......।

शत्रु यदिआंख दिखा रहा , हो  खड़े ललकार रहा।
अलौकिक तेज पुंज से वीरता की लौ जलाए
 रखना.......।

दिख गया गरीब,भूख से बिलखते हुए।
मन द्रवित हो जाएगा,
 स्वार्थ को त्याग कर,परमार्थ की लौ जलाए रखना.......

स्नेह लता पाण्डेय
      नई दिल्ली